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नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों में इलाज और आपातकालीन बचाव व्यवस्था होगी मजबूत

काठमांडू, 06 नवंबर । नेपाल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘उच्च पहाड़ी तथा हिमालयी क्षेत्रों में ऊंचाई संबंधी बीमारी (हाई अल्टिट्यूड माउंटेन सिकनेस) की रोकथाम, पहचान, उपचार और प्रबंधन को व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने के लिए प्रबंधन संबंधी मानक-20२६’ को मंजूरी दी है। इस मानक का मुख्य उद्देश्य अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों, ट्रेकर्स, पर्वतारोहियों और स्थानीय निवासियों में होने वाली इस बीमारी की समय पर पहचान और उचित उपचार सुनिश्चित करना है।

इसके तहत विशेष रूप से उच्च पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य संस्थानों की उपचार क्षमता बढ़ाने, जरूरी दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा आपातकालीन बचाव और मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

समुद्र तल से 2,500 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर पहुंचने पर वायुमंडलीय दबाव कम हो जाता है, जिससे शरीर को मिलने वाली ऑक्सीजन की मात्रा घटने लगती है। ऐसी स्थिति में जब शरीर नए वातावरण के अनुकूल खुद को ढाल नहीं पाता, तो ऊंचाई संबंधी बीमारी हो सकती है। शुरुआत में सामान्य लक्षणों के रूप में दिखाई देने वाली यह समस्या समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर गंभीर रूप ले सकती है। इससे फेफड़ों में पानी भरने (हाई अल्टिट्यूड पल्मोनरी एडेमा) और मस्तिष्क में सूजन (हाई अल्टिट्यूड सेरेब्रल एडेमा) जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

नए मानक में इस बीमारी की रोकथाम के लिए धीरे-धीरे ऊंचाई बढ़ाने, शरीर को नए वातावरण के अनुकूल बनाने के लिए पर्याप्त समय देने, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीने और लक्षण दिखाई देने पर आगे ऊंचाई की ओर नहीं बढ़ने जैसे उपायों को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा बीमारी से प्रभावित मरीजों को जरूरत के अनुसार तत्काल कम ऊंचाई वाले स्थान पर ले जाने, ऑक्सीजन और प्रेशर बैग का इस्तेमाल करने तथा मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार करने की व्यवस्था भी शामिल की गई है।

मानक के अनुसार उच्च पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों के स्वास्थ्य संस्थानों में ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, पल्स ऑक्सीमीटर, हाइपरबेरिक चैंबर (गामो बैग), आपातकालीन उपचार के उपकरण और जरूरी दवाएं उपलब्ध करानी होंगी। इसमें बीमारी की पहचान, उपचार और प्रबंधन के लिए आवश्यक दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों की सूची भी शामिल की गई है। नए मानक में संघीय, प्रांतीय और स्थानीय सरकारों की जिम्मेदारियां भी निर्धारित की गई हैं। इसके तहत संघीय सरकार नीति, मानक, स्वास्थ्य जनशक्ति, बजट प्रबंधन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगी।

प्रांतीय सरकार स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता विकास और तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करेगी। स्थानीय सरकारों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, आवश्यक दवाओं एवं चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता और मरीजों को जरूरत के अनुसार दूसरे स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।