बेजान हाथों को मिली संजीवनी, ठाणे सिविल में सर्जरी से जागी किस्मत
मुंबई,23 जनवरी । जो बढ़ई (कारपेंटर ) अपने हाथों के बल खड़ा होता है, उसके लिए हाथ खोने का मतलब है जीना छोड़ देना। ठाणे जिला में कल्याण इलाके के एक कारपेंटर को कार्पल टनल सिंड्रोम (कलाई) हो गया था, उसकी भी ऐसी ही गंभीर हालत थी। हालांकि, ठाणे सिविल हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सिर्फ आधे घंटे में थोड़ी मुश्किल सर्जरी को सफलतापूर्वक करके बेजान हाथों को जैसे संजीवनी थमा कर ज़िंदगी में सोई किस्मत जगा दी हो।
डॉ प्रशांत ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अशोक शर्मा, जो पिछले 30 सालों से कारपेंटर का काम कर रहे थे, लगातार मेहनत करने की वजह से कार्पल टनल सिंड्रोम की गंभीर समस्या हो गई थी। लगातार हाथ से काम करने की वजह से उनकी कलाई की नसें दब गई थीं। इस वजह से उनके हाथों का मूवमेंट ( सक्रियता)धीमा हो गया था, उंगलियों में दर्द और झुनझुनी हो रही थी, और रोज़ के काम करना भी मुश्किल हो गया था। पिछले एक साल से यह समस्या और भी गंभीर हो गई थी।
एक प्राइवेट हॉस्पिटल में उनकी जांच के बाद सर्जरी का खर्च एक से डेढ़ लाख रुपये आंका गया। पैसे की हालत ठीक होने की वजह से इलाज टालना पड़ा। इसी बीच, परिवार को जानकारी मिली कि ठाणे सिविल हॉस्पिटल में ऐसी सर्जरी फ्री में सफलतापूर्वक की जा रही हैं। इसके बाद, परिवार ने सिविल हॉस्पिटल में इलाज कराने का फैसला किया। गुरुवार को, डिस्ट्रिक्ट सर्जन डॉ. कैलाश पवार के गाइडेंस में, ठाणे सिविल हॉस्पिटल में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट सर्जन और ऑर्थोपेडिस्ट डॉ. धीरज महानगड़े की लीडरशिप में एक्सपर्ट डॉक्टरों की एक टीम ने अशोक शर्मा की कलाई की सर्जरी सिर्फ आधे घंटे में सफलतापूर्वक की गई है। अशोक की हालत स्टेबल है और उनके हाथ का मूवमेंट धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। इसके लिए डॉ. मयूर नागरगोचे, डॉ. विशाल आचार्य, डॉ. अजीत भुसारे और दूसरों ने बहुत मेहनत की।
अशोक शर्मा ने कहा, “प्राइवेट हॉस्पिटल का खर्च उठाना संभव नहीं था। मुझे उम्मीद नहीं थी कि ठाणे सिविल हॉस्पिटल में इतनी अच्छी और सफल सर्जरी हो जाएगी। अब दर्द काफी कम हो गया है और मुझे फिर से काम करने की उम्मीद है।”
ठाणे जिला सिविल अस्पताल के अतिरिक्त सर्जन डॉ धीरज महानगड़े ने बताया कि कार्पल टनल सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है जो बढ़ई, टाइपिस्ट और कंप्यूटर इस्तेमाल करने वालों में बहुत पाई जाती है जो लगातार अपने हाथों से काम करते हैं। इस बीमारी के लक्षणों में हाथों में झुनझुनी, उंगलियों का काम न करना वगैरह शामिल हैं। अगर सही समय पर इसका पता चल जाए और ऑपरेशन हो जाए, तो मरीज़ पूरी तरह ठीक हो सकता है।

