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विदेश मंत्री जयशंकर ने निष्पक्ष वैश्विक व्यवस्था का आह्वान किया, कश्मीर मामले में संयुक्त राष्ट्र के रवैये की आलोचना की

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आज निष्पक्ष और मजबूत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग में ‘सिंहासन और कांटे: राष्ट्रों की अखंडता की रक्षा’ सत्र में बोलते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत वैश्विक व्यवस्था की अनुपस्थिति न केवल शक्तिशाली देशों को लाभ पहुंचाती है, बल्कि छोटे देशों को जोखिम उठाने और स्थापित मानदंडों को चुनौती देने में भी सक्षम बनाती है।

डॉ. जयशंकर ने कश्मीर पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे के साथ भारत के अनुभव का हवाला देते हुए संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस मुद्दे से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की और ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों की भूमिका पर सवाल उठाए, जिन्होंने कहा कि शुरुआत में पाकिस्तान की आक्रामकता को मान्यता देने के बजाय आक्रमण को विवाद के रूप में पेश किया।

मंत्री ने म्यांमार और पश्चिमी देशों में सैन्य तख्तापलट के प्रति भिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं की ओर इशारा करते हुए वैश्विक मानकों में निष्पक्षता और स्थिरता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने पिछले आठ दशकों में वैश्विक व्यवस्था की गहन समीक्षा करने का आह्वान किया और दुनिया में शक्ति के बदलते संतुलन को मान्यता देने का आग्रह किया।