प्रेरक प्रसंग :- अधिकार और कर्तव्य
एक बार स्वर्गीय जाकिर हुसैन के पास उनके एक परिचित सज्जन एक ऐसे छात्र को लेकर आये , जो नवीं कक्षा में लगातार दो वर्षों से अनुतीर्ण होता आ रहा था | वे सज्जन यह चाहते थे की जाकिर साहब अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग कर उस छात्र को परीक्षा में उत्तीर्ण कर उसे दसवीं कक्षा में दाखिल करायें | उस समय हुसैन जामिया मिलिया में उपकुलपति थे |
जब उन सज्जन ने जाकिर साहब से इस सम्बन्ध में प्रार्थना की, तो वे उनकी ओर प्रथम तो देखते रहे | फिर बोले, ‘’अच्छा तो आप चाहते हैं कि मैं अपने खसूसी अख्त्यारात का गलत इस्तेमाल करूँ ? कोई बात नहीं | आप दफ्तर से बी. ए. का एक फार्म ले आइए, मैं इन्हीं बी. ए. में दाखिला दिये देता हूँ, क्योकिं मेरे अख्त्यारात में यह भी है | जब गलत कार्य करने आये हैं, तो बड़ा गलत काम ही क्यों नहीं कराते ?’’ यह सुन वे महोदय झेंप गये | तब जाकिर साहब पुनः बोले, ‘’मुझे आपसे येसी कोई उम्मीद न थी | मेरी आपके प्रति जो भावना थी, उस पर अपने पानी फेर दिया |’’ अब वे सज्जन और छात्र दोनों बड़े लज्जित हुए और क्षमा माँगकर उन्होंने फ़ौरन राह ली |

