भारत-पोलैंड संबंधों ने नए दौर में किया प्रवेश : पोलिश राजदूत
भारत में पोलैंड के राजदूत पियोट्र एंटोनी स्विताल्स्की ने कहा है कि पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की अक्टूबर में भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंध एक नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक शासन व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय तनाव और विभिन्न संघर्षों जैसे मुद्दों पर भारत और पोलैंड की सोच काफी हद तक समान है।
आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में राजदूत ने बताया कि प्रधानमंत्री टस्क की यात्रा के दौरान 100 से अधिक पोलिश कंपनियों और करीब 200 भारतीय कंपनियों ने संभावित कारोबारी सहयोग पर चर्चा की। नई दिल्ली और बेंगलुरु में आयोजित दो व्यापारिक मंचों के दौरान 13 समझौतों, समझौता ज्ञापनों और रुचि पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए।
उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी आयोजन था और इससे आर्थिक सहयोग के नए अवसर खुले हैं।
पोलैंड की G20 में स्थायी सदस्यता की कोशिशों में भारत के समर्थन को महत्वपूर्ण बताते हुए स्विताल्स्की ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज का काफी महत्व है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और पोलैंड G20 के मंच पर मिलकर काम कर सकेंगे।
राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड टस्क के बीच हुई मुलाकात को भी सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर अच्छा तालमेल और मित्रतापूर्ण बातचीत हुई। टस्क ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को स्थिर करने और शांति बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों की सराहना की।
अक्टूबर में हैदराबाद हाउस में हुई बैठक के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने महत्वपूर्ण खनिजों, रक्षा, हरित प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की थी। इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए गए थे।
रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए स्विताल्स्की ने भारत की शांति पहल और आंशिक युद्धविराम के प्रस्तावों को उपयोगी और आवश्यक कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड दोनों चाहते हैं कि यह संघर्ष जल्द समाप्त हो। उन्होंने पूर्वी यूरोप में शांति बहाली के प्रयासों में भारत की भूमिका के प्रति आभार भी जताया।
प्रधानमंत्री मोदी के वैश्विक नेतृत्व पर राजदूत ने कहा कि शांति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और व्यक्तिगत प्रभाव ने उन्हें उम्मीद की किरण बनाया है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह विरोधी पक्षों में खड़े देशों के साथ भी मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखता है और सभी से बातचीत करने की क्षमता रखता है।

