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नेपाल के सत्तारूढ़ दल के मंत्रियों को माह में एक बार पार्टी मुख्यालय में बैठने का निर्देश

काठमांडू, 10 अगस्त । नेपाल के सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने अपने मंत्रियों को नागरिकों के प्रति जवाबदेही बनाने के लिए केंद्रीय कार्यालय घंटीघर में प्रत्येक मंत्री को महीने में एक बार अनिवार्य रूप से दो घंटे उपस्थित होने का निर्देश जारी किया है।

पार्टी के सह महामंत्री आसिम शाह ने कहा, “लोकतंत्र का मूल भाव यह है कि निर्वाचित नेतृत्व लगातार नागरिकों की निगरानी, सुझाव और संपर्क में रहे। इसी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए जनउत्तरदायी, पारदर्शी और परिणाममुखी राजनीतिक संस्कार विकसित करने के लिए मंत्री महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से केंद्रीय पार्टी कार्यालय में उपस्थित होकर नागरिकों और पार्टी की पंक्ति के साथ प्रत्यक्ष संवाद करेंगे।”

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम आम लोगों की आवाज को सीधे राज्य के नीति-निर्माण और कार्यान्वयन के स्तर तक पहुंचाने वाले पुल के रूप में काम करेगा।

शाह के अनुसार, एक ही दिन दो चरणों में कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। पहले चरण में ‘नागरिक संवाद’ होगा। शाम 5 बजे से 6 बजे तक एक घंटे का समय पूरी तरह आम नागरिकों के लिए खुला रहेगा। इस दौरान मंत्री सीधे आम लोगों की शिकायतें, समस्याएं, अपेक्षाएं और सुझाव सुनेंगे।

इसी तरह, दूसरे चरण में शाम 6 बजे के बाद एक घंटे तक ‘नेतृत्व संवाद’ कार्यक्रम चलेगा। इस चरण में मंत्री, पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य और प्रतिनिधिसभा सदस्य संयुक्त बैठक करेंगे। इसके बाद पहले चरण में नागरिकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर देश के समसामयिक, बहुआयामी और नीतिगत विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी।

शाह ने कार्यक्रम संचालित करने के चार प्रमुख कारण बताए हैं। पहला, नागरिक, सरकार (मंत्री), विधायिका (सांसद) और संगठन (केंद्रीय समिति) के बीच समन्वय को मजबूत करते हुए नागरिकों के मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिए साझा रणनीति तय करना है।

दूसरा उद्देश्य मंत्रियों को आम नागरिकों के प्रति सीधे तौर पर जवाबदेह बनाना है। तीसरे उद्देश्य के तहत नागरिकों की वास्तविक समस्याओं को समझकर राष्ट्रीय नीति और कानून निर्माण के संबंध में पार्टी की धारणा तय की जाएगी।

चौथा उद्देश्य नागरिकों, पार्टी के संगठनात्मक स्तर, संसदीय दल और सरकार में मौजूद प्रतिनिधियों के बीच प्रभावी सूचना तथा कार्ययोजना का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है।