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राज्य सरकार निवेशकों को हरसंभव सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराएगी : सम्राट चौधरी

पटना, 01 अक्टूबर।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ताज सिटी सेंटर, पटना में राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट- 2026 के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए गुरुवार को कहा कि बिहार निवेश के लिए तैयार है। राज्य में उद्योगों के लिए सड़क, बिजली, पानी और अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं को विकसित किया जा रहा है। उन्होंने उद्योगपतियों और निवेशकों से बिहार में निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को हरसंभव सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।

मुख्यमंत्री ने बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्व प्रसिद्ध ज्ञान केंद्र, मगध और पाटलिपुत्र की गौरवशाली विरासत तथा भगवान बुद्ध, भगवान महावीर और गुरु गोविंद सिंह जी से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर बिहार की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि बिहार केवल सांस्कृतिक विरासत का केंद्र नहीं, बल्कि ज्ञान और आर्थिक विकास की ऐतिहासिक भूमि भी रही है। बिहार की बड़ी आबादी को कमजोरी की बजाए आर्थिक शक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। 14 करोड़ की आबादी वाला बिहार देश के लिए बड़ा बाजार है। सरकार का लक्ष्य राज्य में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाना है, ताकि बिहार के लोगों को मजदूरी के लिये लिए दूसरे राज्यों में पलायन न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के लिए सड़क, बिजली और पानी की उपलब्धता आवश्यक है। राज्य में सड़क नेटवर्क का विस्तार किया गया है और राष्ट्रीय राजमार्गों तथा एक्सप्रेस-वे के विकास पर भी काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में बिजली की उपलब्धता और खपत में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा आने वाले वर्षों में बिजली उत्पादन और आपूर्ति क्षमता को और बढ़ाने का लक्ष्य है। उन्होंने बिहार की बाढ़ और जल प्रबंधन की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि नेपाल और पड़ोसी राज्यों से आने वाले पानी के कारण बिहार को हर वर्ष बाढ़ की चुनौती का सामना करना पड़ता है। गंगा, कोसी और गंडक सहित प्रमुख नदियों के जल प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने की आवश्यकता है। कोसी नदी क्षेत्र में औद्योगिक कॉरिडोर, टाउनशिप और विकास की अन्य गतिविधियों की संभावनाओं पर भी काम किया जा सकता है। जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से उद्योग, कृषि और पर्यटन तीनों क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण बिहार के कई क्षेत्रों में सूखे की समस्या रहती है। राज्य सरकार गंगा के पानी को जरूरत के समय पेयजल और सिंचाई के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री ने निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि बिहार में स्थापित होने वाले उद्योगों के उत्पाद मानक के अनुरूप होने पर सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जायेगी। 25 प्रतिशत उत्पाद बिहार सरकार खरीदेगी। इसके साथ ही बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी सरकार काम करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की खरीद नीति को उद्योगों के लिए और अधिक उपयोगी बनाने के लिए उसमें संशोधन किया जा रहा है। राज्य में होटल, पर्यटन और ईको टूरिज्म के क्षेत्र में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। पटना और गया सहित विभिन्न स्थानों पर होटल एवं अन्य पर्यटन परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बिहार में मात्र 8000 किमी सड़कों का नेटवर्क था जबकि आज लगभग 1.5 लाख किमी हो गया है। अब ग्रामीण सड़कों की स्थिति पहले से बहुत बेहतर हो गयी है। बिजली के क्षेत्र में भी पहले राज्य काफी पिछड़ा हुआ था। पहले बिजली की उपलब्धता 2005 में मात्र 500 मेगावाट थी वहीं अब यह बढ़कर 10 हजार मेगावाट से अधिक हो गई है। राज्य सरकार का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में इसे बढ़ाकर 20 हजार मेगावाट करने का है। बिजली की उपलब्धता और वितरण क्षमता को और मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में रोप-वे और जल परिवहन जैसी परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पटना से गंगा नदी के ऊपर होते हुए सोनपुर के बाबा हरिहरनाथ मंदिर तक रोप-वे परियोजना शुरू करने की दिशा में भी पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार को समृद्ध बनाने के लिए सरकार आधारभूत संरचना, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। निवेशक बिहार की क्षमता और संभावनाओं पर भरोसा करते हुए राज्य में निवेश करें। उन्होंने कहा कि बिहार में रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना सरकार की प्राथमिकता है। आने वाले वर्षों में ऐसे लोगों को राज्य में ही रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, जो रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं।