शंघाई में बिखरी भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनूठी छटा
शंघाई, 30 मई। चीन के दूसरे सबसे बड़े शहर एवं औद्योगिक केन्द्र शंघाई में चीन सरकार के एक आयोजन में भारत की कालातीत देन ‘योग’ और देश की जीवंत शास्त्रीय संगीत परंपरा की सुमधुर प्रस्तुतियों ने 70 से अधिक देशों के गणमान्य अतिथियों का मनमोह लिया।
शंघाई में वार्षिक ‘कांसुलर कोर कल्चरल चैरिटी गाला डिनर 2026’ के भव्य समारोह में ‘कंट्री ऑफ ऑनर’ (सम्मानित देश) के तौर पर भारत सहित चार देशों को अपनी अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रदर्शन के लिए आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में भारत के महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने देश का प्रतिनिधित्व किया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत ने इस मंच पर अपनी समृद्ध सभ्यता, विरासत और कलात्मक परंपराओं का शानदार प्रदर्शन किया। प्रस्तुति के दौरान दुनिया को भारत की कालातीत देन ‘योग’ और देश की जीवंत शास्त्रीय संगीत परंपरा को रेखांकित किया गया। इसके अलावा, समारोह में कुचिपुड़ी नृत्य पेश किया गया, इस मनमोहक नृत्य को देखकर वहां मौजूद दर्शक आनंदित हो उठे।
सांस्कृतिक विविधता और अंतरराष्ट्रीय मित्रता के उत्सव वाले इस आयोजन में 70 से अधिक देशों के महावाणिज्य दूत, वरिष्ठ राजनयिक के साथ-साथ व्यापारिक जगत की दिग्गज हस्ती और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रतीक माथुर ने भारत के शाश्वत दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (विश्व एक परिवार है) पर जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आपसी समझ और ‘ग्लोबल साउथ’ की आकांक्षाओं को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।
माथुर ने कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने और देशों के बीच सेतु (पुल) का निर्माण करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने वहां मौजूद राजनयिकों, निवेशकों तथा व्यापारिक नेताओं को भारत आने और देश की गतिशील विकास गाथा का प्रत्यक्ष अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया।
इस दौरान माथुर ने कई प्रमुख क्षेत्रों में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इनमें आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचा, डिजिटल परिवर्तन, सतत विकास और नवाचार इनोवेशन शामिल है। उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को साकार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करने के भारत के दृष्टिकोण को भी साझा किया। उन्होंने माना कि यह आयोजन भारत की सक्रिय भागीदारी सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने और पूर्वी चीन में प्रतिनिधित्व करने वाले देशों के साथ दोस्ती तथा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

