दही और केफिर: समान दिखते, लेकिन अलग हैं दोनों
दही और केफिर दोनों ही दूध से बने फर्मेंटेड उत्पाद हैं, लेकिन उनकी बनावट, स्वाद और बनने की प्रक्रिया अलग होती है। दही गाढ़ा और चम्मच से खाने योग्य होता है, जबकि केफिर पतला, हल्का फिजी और पीने वाला पेय है। स्वाद में भी फर्क है—केफिर ज्यादा खट्टा और तीखा लगता है, वहीं दही क्रीमी और हल्का होता है।
केफिर को अक्सर “पीने वाला दही” कहा जाता है, लेकिन यह दही से अलग पारंपरिक फर्मेंटेड ड्रिंक है। इसे दूध में प्राकृतिक बैक्टीरिया, यीस्ट और केफिर ग्रेन्स मिलाकर तैयार किया जाता है। इसकी फर्मेंटेशन प्रक्रिया लंबी और थोड़ी जटिल होती है, जिससे इसमें अधिक प्रकार के लाभकारी सूक्ष्मजीव विकसित होते हैं।
दही को खास बैक्टीरियल कल्चर से जमाया जाता है। यह रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा है और रायता, कढ़ी, स्मूदी या डिप के रूप में इस्तेमाल होता है। ग्रीक योगर्ट और पारंपरिक दही के स्वाद और बनावट में भी अंतर होता है, लेकिन दोनों ही केफिर से अलग हैं।
सेहत के नजरिए से दोनों फायदेमंद माने जाते हैं। केफिर में कई प्रकार के प्रोबायोटिक्स पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र और आंतों के संतुलन के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और विटामिन B12 व K2 जैसे पोषक तत्व भी मिलते हैं। फर्मेंटेशन के दौरान लैक्टोज का स्तर कम हो जाता है, इसलिए यह कुछ लोगों के लिए पचाने में आसान हो सकता है।
दही भी इम्यूनिटी और पाचन के लिए लाभकारी है और भारतीय भोजन का अहम हिस्सा है। केफिर को सीधे पिया जा सकता है या स्मूदी, सलाद ड्रेसिंग और बेकिंग में मिलाया जा सकता है।

