इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट पीएलआई में 22 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी, 41,863 करोड़ रुपए के निवेश की उम्मीद
02 जनवरी । सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के तहत 22 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से करीब 41,863 करोड़ रुपए के निवेश और 37,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
22 परियोजनाओं से लगभग 2.58 लाख करोड़ रुपए के उत्पादन का अनुमान
इन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता में कमी आएगी। मंजूरी प्राप्त 22 परियोजनाओं से लगभग 2.58 लाख करोड़ रुपए के उत्पादन का अनुमान है। स्वीकृत परियोजनाओं में डिक्सन टेक्नोलॉजीज, सैमसंग डिस्प्ले नोएडा प्राइवेट लिमिटेड, फॉक्सकॉन की युझान टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। यह मंजूरी पहले स्वीकृत 24 आवेदनों के अतिरिक्त है, जिनमें 12,704 करोड़ रुपए का निवेश किया गया था।
परियोजनाएं आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में की जाएंगी स्थापित
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इस चरण की स्वीकृतियों में मोबाइल फोन, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर सहित कुल 11 क्षेत्रों में विनिर्माण गतिविधियां शामिल हैं। ये परियोजनाएं आठ राज्यों- आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान- में स्थापित की जाएंगी। इंडस्ट्री लीडर्स ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत के इरादों से क्रियान्वयन की ओर निर्णायक कदम बताया। आईईएसए और एसईएमआई इंडिया के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा, “2025 के अंत तक भारत ने एक विश्वसनीय और निवेश योग्य ईएसडीएम गंतव्य के रूप में वैश्विक विश्वास अर्जित कर लिया है।
मांग सृजन आपूर्ति सृजन जितना ही महत्वपूर्ण
ईसीएमएस एक क्रांतिकारी बदलाव है, क्योंकि मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के लिए केवल सेमीकंडक्टर ही नहीं, बल्कि कंपोनेंट्स, मैटेरियल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू एडिशन भी आवश्यक हैं।” उन्होंने कहा कि अगले चरण में उत्पादन बढ़ाने, मजबूत डिजाइन टीमों के निर्माण, स्थानीय स्तर पर सोर्सिंग और निर्मित उत्पादों में विश्व स्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। ओईएम और सिस्टम कंपनियों को मेड-इन-इंडिया कंपोनेंट्स को सक्रिय रूप से अपनाना चाहिए, क्योंकि मांग सृजन आपूर्ति सृजन जितना ही महत्वपूर्ण है।
योजना प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल कंपोनेंट्स, कैमरा मॉड्यूल सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक घटकों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर केंद्रित
मूल्य श्रृंखला को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार ने 2025 में ईसीएमएस योजना की शुरुआत की है। यह योजना प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल कंपोनेंट्स, कैमरा मॉड्यूल सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक घटकों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। नीतिगत प्रयासों के चलते भारत एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता के रूप में उभरा है। पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण लगभग छह गुना बढ़कर 2014-15 में 1.9 लाख करोड़ रुपए से 2024-25 में 11.32 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

