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महाराष्ट्र के CM फडणवीस ने मनसे के विरोध प्रदर्शन की अनुमति न देने के आरोपों को किया खारिज

मीरा रोड पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को विरोध प्रदर्शन की अनुमति न मिलने की खबरों को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाई थी, बल्कि केवल प्रदर्शन के लिए प्रस्तावित मार्ग पर आपत्ति जताई थी और वैकल्पिक मार्ग सुझाया गया था, जिसे मनसे ने स्वीकार नहीं किया।

विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “यह कहना गलत होगा कि मनसे को विरोध की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस ने सिर्फ उस मार्ग पर आपत्ति जताई थी, जहां वे प्रदर्शन करना चाहते थे। हमने उन्हें विकल्प सुझाया था, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि मनसे ने एक बैठक के लिए अनुमति मांगी थी, जिसे प्रशासन ने मंजूर कर लिया था। हालांकि, बाद में वे जिस मार्ग पर विरोध मार्च निकालना चाहते थे, वह सुरक्षा कारणों से उपयुक्त नहीं था। “हमने उनसे वैकल्पिक मार्ग लेने को कहा, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए,” उन्होंने कहा।

मनसे का यह विरोध प्रदर्शन मीरा रोड पर मंगलवार को प्रस्तावित था, जिसकी पृष्ठभूमि में हाल ही में मराठी-हिंदी भाषा विवाद को लेकर हुई हिंसक घटनाएं थीं। इन्हीं घटनाओं के चलते पुलिस ने सतर्कता बरतते हुए कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

एडिशनल सीपी दत्ता शिंदे ने बताया कि मीरा रोड में पहले हुई एक घटना के मद्देनज़र विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। “हम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क हैं। स्थिति फिलहाल शांतिपूर्ण है और हमने लोगों से अपील की है कि वे इकट्ठा न हों,” उन्होंने कहा।

मनसे नेता अविनाश जाधव को एहतियातन हिरासत में लिया गया है। इस बारे में गृह राज्य मंत्री योगेश रामदास कदम ने स्पष्ट किया, “इस मामले में कोई राजनीति नहीं है। जिस स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई थी, वहां कुछ समस्याएं हो सकती थीं। हमने स्थान बदलने का सुझाव दिया था, लेकिन वे तैयार नहीं हुए।”

भाषा विवाद से उपजा तनाव

यह पूरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब एक वायरल वीडियो में दिखा कि कुछ लोगों ने एक दुकानदार को मराठी में बात न करने पर पीटा। यह घटना मीरा-भायंदर क्षेत्र की थी। इसके बाद वर्ली में भी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के पांच कार्यकर्ताओं द्वारा एक कारोबारी के कार्यालय में तोड़फोड़ की गई, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें धारा 223, 189(2), 189(3), 190, 191(2), 191(3) और 125 शामिल हैं।