महाराष्ट्र: पुष्प उद्योग की रक्षा के लिए प्लास्टिक फूलों पर प्रतिबंध की मांग तेज़
महाराष्ट्र में फूलों की खेती का परंपरागत उद्योग कृत्रिम प्लास्टिक फूलों की बढ़ती लोकप्रियता के चलते गंभीर संकट में है। इसे लेकर सोमवार को विधानसभा में सभी दलों के विधायकों ने एकजुट होकर चिंता जताई और सिंथेटिक फूलों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।
शिवसेना विधायक महेश शिंदे ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि कृत्रिम फूलों में टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे विषैले रसायन पाए जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “कुछ यूरोपीय देशों ने पहले ही इन फूलों पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब भारत को भी ऐसा कदम उठाना चाहिए।”
शिंदे ने सतारा जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां फूलों की खेती कभी बड़े पैमाने पर होती थी, लेकिन अब लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा, “पहले वहां लगभग 1,300 ग्रीनहाउस थे, लेकिन आज यह संख्या घटकर 50 से भी कम रह गई है। अकेले वेर्ने गांव में पहले 375 ग्रीनहाउस थे, और अब वहां फूलों का कारोबार लगभग समाप्त हो चुका है।”
विधायकों का कहना है कि प्लास्टिक के फूल न केवल किसानों की आजीविका छीन रहे हैं, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल रहे हैं। इस मुद्दे पर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।

