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ChatGPT को भूल जाइए, OpenAI का नया AI महामारियों से लड़ने की करेगा तैयारी

एआई कंपनियां अब चैटबॉट्स से आगे निकल दूसरी चीजों की तैयारी कर रही हैं. कुछ दिन पहले पहले मेटा ने एआई की मदद से बीमारियों की रोकथाम का तरीका ढूंढने के प्रोजेक्ट पर भारी निवेश किया था तो अब ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI भी ऐसा ही काम करने जा रही है. OpenAI ने Rosalind Biodefense नाम से एक इनीशिएटिव में हिस्सा लिया है, जहां वह अपने एआई मॉडल की मदद से रिसर्चर की मदद करेगी. आइए जानते हैं कि OpenAI इस प्रोग्राम के जरिए क्या हासिल करना चाहती है.

Rosalind Biodefense प्रोग्राम को उन डेवलपर्स और रिसर्चर की मदद के लिए डिजाइन किया गया है, जो महामारी जैसे बायोलॉजिकल खतरों से निपटने के लिए टूल्स तैयार कर रहे हैं. इन रिसर्चर को OpenAI अपने GPT-Rosalind मॉडल की एक्सेस देगी. साथ ही कंपनी उन संगठनों की भी मदद करेगी, जो बीमारियों की पहचान, पब्लिक हेल्थ, स्क्रीनिंग सिस्टम और इससे संबंधित दूसरे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं. OpenAI ने कहा है कि बायोलॉजिकल खतरों की पहचान के लिए काम कर रहे लोगों और ग्रुप्स की मदद के लिए एडवांस्ड एआई सिस्टम का यूज होना चाहिए. कंपनी की उन प्रोजेक्ट्स में खास दिलचस्पी है, जहां पर एआई की मदद से रिसर्च को तेज किया जा सके. कंपनी ने सरकारी एजेंसियों और पब्लिक हेल्थ पर काम कर रहे सहयोगियों के लिए भी GPT-Rosalind की एक्सेस ओपन कर दी है.

मेटा भी ढूंढ रही है एआई से बीमारियों का इलाज

कुछ दिन पहले जानकारी सामने आई थी कि मेटा ने जुकरबर्ग की पत्नी Priscilla Chan के स्टार्टअप Biohub के एक प्रोजेक्ट पर भारी निवेश किया है. अगर यह प्रोजेक्ट कामयाब होता है तो बीमारियों का इलाज ढूंढना आसान हो जाएगा. Virtual Biology Initiative नाम का यह प्रोजेक्ट अगले पांच सालों तक चलेगा. मेटा ने इसके लिए 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया है. इस पैसे से ऐसे एआई सिस्टम बनाए जाएंगे, जो इंसानी सेल्स की तरह का करेंगे. बायोलॉजिकल डेटा को यूज कर सेल्स के डिजिटल मॉडल बनाए जाएंगे. इसका फायदा यह होगा कि वैज्ञानिक लैब की जगह इन पर वर्चुअल तरीके से काम कर सकेंगे. इससे उन्हें सेल्स के काम करने का तरीका समझने में मदद मिलेगी, जिससे बीमारियों की रोकथाम या इलाज पर काम शुरू हो पाएगा. हालांकि, इसमें कई चुनौतियां आएंगी और कंपनी भी यह बात जानती है. इस प्रोजेक्ट के लिए बहुत डेटा और नई टेक्नोलॉजी की जरूरत पड़ेगी.