MMRDA में भूमि अधिग्रहण का कोई नियम ही नहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट की फटकार के बाद अब 4 हफ्ते में बनेंगी गाइडलाइंस
मुंबई : मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने बॉम्बे हाई कोर्ट को सूचित किया है कि भूमि अधिग्रहण को लेकर दिशा-निर्देश तैयार करने का काम प्रगति पर है। चार हफ्ते में गाइडलाइंस कोर्ट में पेश की जाएगी। एमएमआरडीए का पक्ष रख रहे ऐडवोकेट अक्षय शिंदे ने कोर्ट को यह जानकारी दी है। कोर्ट में 92 साल के बुज़ुर्ग की याचिका पर सुनवाई चल रही है। एमएमआरडीए ने मुंबई मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बुजुर्ग की गोरेगांव स्थित जमीन अधिग्रहित की थी, लेकिन अब तक बुज़ुर्ग के भूमि के मुआवज़े का हल नहीं हो पाया है।
याचिका के अनुसार, बुज़ुर्ग की जमीन के मुआवज़े के संबंध में 23 अगस्त, 2019 को एक आदेश जारी किया गया था। आदेश से बुज़ुर्ग संतुष्ट नहीं थे, इसलिए उन्होंने केस को लघुवाद न्यायालय में रेफर करने का निवेदन किया था। यह मामला चार साल से पेंडिंग पड़ा था।
‘लघुवाद न्यायालय मार्च, 2025 तक करें आवेदन का निपटारा’
अब जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन की बेंच ने ऐडवोकेट शिंदे की बात को रिकॉर्ड में लेकर 6 हफ्ते में रेफरेंस की प्रक्रिया को पूरा करने को कहा है, साथ ही लघुवाद न्यायालय को केस से संबंधित आवेदन की सुनवाई 31 मार्च, 2025 तक पूरा करने का निर्देश दिया है। बेंच ने कहा कि मामले से जुड़े पक्षकार अनावश्यक सुनवाई को टालने से बचें।
पिछली सुनवाई के दौरान बेंच ने एमएमआरडीए को इस विषय को लेकर दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा था। इसके तहत ऐडवोकेट शिंदे ने कोर्ट को उपरोक्त जानकारी दी है। इससे पहले उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस केस को रेफरेंस के लिए लघुवाद न्यायालय में रेफर किया जाएगा।
‘MMRDA कमिश्नर ने भी गाइडलाइंस की जरूरत की थी महसूस’
एमएमआरडीए की एक्जेक्यूटिव इंजिनियर (विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी) की निष्क्रियता से परेशान बुज़ुर्ग ने कोर्ट में याचिका दायर की है। 3 अक्टूबर को एमएमआरडीए कमिश्नर ने कहा था कि संबंधित विभाग ने जिस तरीके से इस मामले को हैंडल किया है, वह खेदजनक है। एमएमआरडीए में भूमि अधिग्रहण के मामलों के लिए तत्काल एक व्यवस्था तैयार कर उसे सक्रिय करने की ज़रूरत है, ताकि भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुद्दों को विभाग स्तर पर तेजी से कुशलता पूर्ण ढंग से निपटाया जा सके।

