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जय फिलिस्तीन का नारा राष्ट्र विरोधी कृत्य…रद्द हो ओवैसी की सदस्यता, नवनीत राणा का राष्ट्रपति को पत्र, जानें क्या लिखा

लोकसभा में जय फिलिस्तीन का नारा लगाने पर अब बीजेपी नेता और पूर्व सांसद नवनीत राणा ने ओवैसी के खिलाफ मोर्चा खोला है। दिल्ली के दौरे पर पहुंची नवनीत राणा ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर लोकसभा की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। ओवैसी ने शपथ के बाद जय फिलिस्तीन का नारा लगाया था।

मुंबई: लोकसभा चुनावों में हैदराबाद से पांचवी बार चुने गए AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के जय फिलिस्तीन का नारा लगाने पर देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस सब के बीच बीजेपी नेता और अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा ने भी ओवैसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राणा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर ओवैसी की लोकसभा सदस्यता खत्म करने की अपील की है। नवनीत राणा का ओवैसी से 36 का आंकड़ा रहा है। लोकसभा चुनावों में जब नवनीत राणा बीजेपी कैंडिडेट माधवी लता का प्रचार करने के लिए हैदराबाद पहुंची थीं तब उनके 15 सेकेंड वाले बयान पर काफी बवाल मचा था। इसके बाद हैदराबार में सियासी पाा चढ़ गया था।

जय फिलिस्तीन पर आपत्ति
नवनीत राणा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज पत्र में अपील की है कि मैं आपसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 102/103 के अनुसार असदुद्दीन ओवैसी की संसद सदस्यता रद्द करने की मांग करती हूं। राणा ने पत्र में लिखाा है कि ओवैसी जो हैदराबाद से जीते हैं उन्होंने शपथ लेने के तुरंत बाद लोकसभा में जय फिलिस्तीन का उद्घोष किया। फिलिस्तीन एक विदेशी देश है जिसका किसी भी भारतीय नागरिक या भारतीय संविधान से कोई लेना-देना नहीं है। राणा ने मांग की है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 102 के अनुसार, कोई भी संसद सदस्य जो किसी अन्य राष्ट्र के प्रति अपनी वफादारी या निष्ठा दिखाता है, या जो ऐसा कृत्य करता है, उसे संसद से निष्कासित किया जा सकता है। ओवैसी ने जय फिलिस्तीन का नारा लगाकर इस राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा, दृढ़ संकल्प और लगाव दिखाया है, जो संविधान का उल्लंघन है।

आंतरिक सुरक्षा को खतरा
राणा ने पत्र में लिखा है कि यह बहुत गंभीर मामला है, यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए घातक साबित हो सकता है। संसद का सदस्य बनना प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश की एकता और अखंडता को बनाए रखे। इसके बाद भी असदुद्दीन ओवैसी ने सार्वजनिक रूप से इसका उल्लंघन किया है, जो एक प्रकार का देशद्रोह है। राणा ने लिखा है कि अनुच्छेद 102 1 (डी) के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो किसी अन्य राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा या प्रतिबद्धता व्यक्त करता है वह संसद के सदस्य के रूप में कार्य नहीं कर सकता है। नवनीत राणा इस बार अमरावती से हार गई हैं। 2019 में वह अमरावती से निर्दलीय चुनी गई थीं।