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चुनाव नतीजे तय करेंगे महाराष्ट्र के दिग्गजों का राजनीति भविष्य

लोकसभा चुनाव के लिए काउंटिंग 4 जून को होने जा रही है। 4 जून की रिजल्ट आ जाएगा। महाराष्ट्र की सियासत देखें यहां पर राजनीतिक टूट-फूट ने महाराष्ट्र को पूरे देश में चर्चित कर दिया। एनसीपी और शिवसेना की फूट के बाद अब महाराष्ट्र के लोकसभा चुनाव रिजल्ट 2024 पर सबकी निगाहें रहेंगी।

मुंबई : देश के दूसरे राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र की राजनीति एक अलग ही प्रवाह में बह रही है। जितनी राजनीतिक टूट-फूट महाराष्ट्र में हुई, उतनी देश के किसी भी राज्य में नहीं हुई, इसलिए यहां के नतीजों पर देशभर की नजरें टिकी हैं। लोकसभा के चुनाव नतीजों के बाद राज्य की सियासत में बड़े उलटफेर से इनकार नहीं किया जा सकता। यह चुनाव मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उद्धव ठाकरे, शरद पवार, अजित पवार का राजनीति भविष्य तय करेगा। कौन किसके साथ रहेगा, कौन किधर जाएगा। यह सब चुनाव नतीजा तय करेगा। साथ ही बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस के लिए भी यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले पांच साल में महाराष्ट्र की सियासत में बड़े बदलाव हुए। सन 2019 का लोकसभा और विधानसभा के चुनाव बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर लड़ा था। विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद बीजेपी और शिवसेना के बीच ऐसा टकराव हुआ कि बीजेपी की आई हुई सत्ता हाथ से चली गई। शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ हाथ मिला लिया और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बन गए, लेकिन उनकी कुर्सी लंबे समय तक नहीं टिकी रही। उनकी ही पार्टी में बगावत हो गई। फिर सूरत से गुवाहाटी और गोवा तक शिंदे सेना के विधायक सफर कर आए।

ऐसे होते गए दो फाड़
शिवसेना के दो फाड़ हो गए और साल 2022 में मुख्यमंत्री के रूप में एकनाथ शिंदे सामने आए। ठीक एक साल बाद 2023 में शरद पवार की पार्टी एनसीपी में भी बगावत हो गई। शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने चाचा से एनसीपी हथिया ली। साथ ही उनके परिवार में भी बिखराव हुआ। सियासत ने पवार परिवार को एक दूसरे के सामने खड़ा कर दिया। इसके बार राज्य में कांग्रेस, उद्धव सेना और शरद पवार की एनसीपी ने छोटे दलों को मिलाकर महाविकास आघाडी बनाई, तो बीजेपी ने शिंदे सेना और अजित पवार की एनसीपी सहित दूसरे छोटे दलों को मिलाकर महायुति बनाई।

लोकसभा चुनाव के सीट बंटवारे में महायुति और महाविकास आघाडी के घटक दलों में खूब माथापच्ची करनी पड़ी। सीट बंटवारे में महायुति में बीजेपी 28, शिंदे सेना 15 और अजित पवार की एनसीपी ने 4 और एक सीट राष्ट्रीय समाज पक्ष को मिली। दूसरी ओर, महाविकास आघाडी में उद्धव सेना 21, कांग्रेस 17 और शरद पवार की एनसीपी को 10 सीटें मिली। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों तरफ से खूब सारे आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए।

नतीजों के बाद बदल सकती है तस्वीर
लोकसभा चुनाव नतीजे आने से पहले ही अनुमान के घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। वंचित बहुजन आघाडी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर का कहना है कि चुनाव नतीजे आने के बाद उद्धव ठाकरे और शरद पवार बीजेपी के साथ जा सकते हैं, क्योंकि उनके पास और कोई विकल्प नहीं है। आंबेडकर के बयान के बाद कांग्रेस सतर्क है। महाविकास आघाडी में उद्धव सेना और शरद पवार की सीटें ज्यादा आने पर अजित पवार और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। ऐसे में संभव है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी शिंदे सेना और अजित पवार को दरकिनार कर दे, लेकिन अगर शिंदे सेना और अजित पवार की ज्यादा सीटें आ जाती हैं, तो उद्धव ठाकरे और शरद पवार पर संकट के बादल घिर जाएंगे। ऐसे में क्या स्थिति बनती है, यह तो समय बताएगा।

फडणवीस पर दांव
लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें कम आने पर देवेंद्र फडणवीस का भविष्य पर राजनीतिक खतरे के बादल मंडराने लगेंगे। सन 2019 के चुनाव में बीजेपी ने 23 लोकसभा सीटें जीती थी। बीजेपी की सीटें कम आने पर दिल्ली में फडणवीस का राजनीति वजन कम होगा। फडणवीस का विरोध खेमा उनके खिलाफ फिर से सक्रिय हो जाएगा। कुल मिलाकर लोकसभा का चुनाव नतीजा विशेष मायने रखता है। यह चुनाव महाराष्ट्र की सियासत को नई दशा और दिशा देगी।