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अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की तकनीकी क्षमता को नई उड़ान

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को हैदराबाद में कॉस्मोसर्व स्पेस की बेस 1 सुविधा का वर्चुअल उद्घाटन करते हुए 2030 तक अंतरिक्ष को मलबा मुक्त बनाने के विजन की रूपरेखा बताई। यह सुविधा सक्रिय अंतरिक्ष मलबा हटाने और कक्षा में सर्विसिंग के लिए समर्पित है।

नई दिल्ली के कर्तव्य भवन से बोलते हुए, सिंह ने कहा कि भारत मलबा हटाने की टेक्नोलॉजी में दुनिया के शुरुआती पायनियर में से एक बन रहा है, और प्राइवेट स्टार्टअप स्पेस को ज़्यादा सुरक्षित और सस्टेनेबल बनाने की क्षमता डेवलप कर रहे हैं।

गाचीबोवली में VSD टेक पार्क में लगभग 14,800 स्क्वायर फुट की फैसिलिटी स्पेस रोबोट के डिज़ाइन, कंस्ट्रक्शन, टेस्टिंग और ऑपरेशन को एक साथ लाती है। इसमें ऑर्बिटल रेंडेज़वस और कैप्चर लैब, स्पेस रोबोटिक्स इनोवेशन लैब, माइक्रोग्रैविटी सिमुलेशन प्लेटफॉर्म, सैटेलाइट इंटीग्रेशन क्लीन रूम और मिशन कंट्रोल फैसिलिटी हैं।

तेलंगाना के IT और इंडस्ट्रीज़ मिनिस्टर डी. श्रीधर बाबू और कॉस्मोसर्व स्पेस के फाउंडर और CEO डॉ. चिरंजीवी फणींद्र हैदराबाद में हुए उद्घाटन में शामिल हुए।

सिंह ने कंपनी के मिशन EMBRACE की तारीफ़ की, जिसने बनने के एक साल के अंदर जुलाई 2026 में सॉफ्ट रोबोटिक पेटल्स का इन-स्पेस टेस्ट किया। उन्होंने कहा कि यह माइलस्टोन भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर की बढ़ती टेक्नोलॉजिकल मैच्योरिटी को दिखाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि टीम ISRO और गगनयान प्रोग्राम से मिले अनुभव को प्राइवेट सेक्टर के डेवलपमेंट और कोलेबोरेशन में कैसे इस्तेमाल कर रही है।

मंत्री ने स्पेस इंडस्ट्री में सहयोग के उदाहरण के तौर पर सैटेलाइट सिस्टम के लिए पिक्सल के साथ कॉस्मोसर्व स्पेस की पार्टनरशिप, प्रोपल्शन सिस्टम के लिए ध्रुव एयरोस्पेस नीदरलैंड्स और लॉन्च सर्विस के लिए स्काईरूट एयरोस्पेस का ज़िक्र किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स इंटीग्रेटेड मिशन बनाने के लिए घरेलू पेलोड, बैटरी टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट सिस्टम और प्राइवेट लॉन्च क्षमताओं को मिला रहे हैं।

सरकार के स्पेस सुधारों और न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड और IN-SPACe की भूमिका को क्रेडिट देते हुए, सिंह ने कहा कि भारत की स्पेस इकॉनमी लगभग $9 बिलियन तक बढ़ गई है और आने वाले दशक में इसके $40-45 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या सिंगल डिजिट से बढ़कर लगभग 450 हो गई है।

सिंह ने कहा कि भारत में लंबे समय से साइंटिफिक टैलेंट और टेक्नोलॉजिकल क्षमताएं हैं, लेकिन एक ऐसे इकोसिस्टम की ज़रूरत है जो युवा इनोवेटर्स को अपनी क्षमता का एहसास करा सके। उन्होंने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय इन्वेस्टर्स से ज़्यादा भागीदारी की अपील की और साइंस और रिसर्च में ज़्यादा परोपकार की अपील की।

उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल पार्टनरशिप के साथ-साथ टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता और सॉवरेन क्षमताएं मुख्य लक्ष्य बने हुए हैं। उन्होंने चंद्रयान और गगनयान का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की तुलना में कम लागत पर एडवांस्ड मिशन को आगे बढ़ाने की क्षमता है।

मंत्री ने गति शक्ति के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग, स्मार्ट सिटी और आपदा की तैयारी में स्पेस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर भी ज़ोर दिया।

कॉस्मोसर्व स्पेस के काम को “विश्व बंधु भारत” का एक उदाहरण बताते हुए सिंह ने कहा कि स्पेस सस्टेनेबिलिटी में इसका योगदान देश की सीमाओं से आगे तक फैला हुआ है और इससे इंसानियत को फायदा होगा।