2030 के बाद चीन से युद्ध का खतरा? ITBP प्रमुख के बयान और JS Sodhi के आकलन से समझिए भारत की चुनौती
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के रिश्तों का प्रमुख मुद्दा रहा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव, सैन्य तैनाती और चीन की बढ़ती सामरिक गतिविधियों के बीच यह सवाल उठता रहा है कि क्या 2030 के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध का खतरा बढ़ सकता है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) प्रमुख के बयान और रक्षा मामलों के जानकार जेएस सोढ़ी के आकलन ने इस चर्चा को फिर महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि, 2030 के बाद युद्ध होने की कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। इस तरह के आकलन को संभावित सुरक्षा चुनौतियों और बदलते सामरिक हालात के संदर्भ में समझना जरूरी है।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का सबसे संवेदनशील क्षेत्र लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैला है। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य तैयारियां बढ़ाईं। इसके बाद सीमा पर तनाव कम करने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत भी जारी रही। चीन की ओर से सीमावर्ती इलाकों में सड़क, सुरंग, हवाई पट्टी और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास भारत की सुरक्षा योजना के लिए अहम विषय है। भारत भी सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क सुविधाओं, निगरानी व्यवस्था और सैन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है।
हाल ही में ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति बने रहने की बात कही। उन्होंने बताया कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष शौर्य कमांडो टीम, ड्रोन प्लाटून और गलवान जैसी परिस्थितियों के लिए विशेष प्रशिक्षण विकसित किया जा रहा है। उनके मुताबिक, आधुनिक युद्ध में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

