नेपाल ने सितंबर-अक्टूबर में भारत को 592 करोड़ रुपये की बिजली बेची, बांग्लादेश को 40 मेगावाट निर्यात फिर शुरू
काठमांडू, 25 अक्टूबर नेपाल विद्युत प्राधिकरण ने चालू वित्त वर्ष 2026/27 के सितंबर-अक्टूबर में भारत को 592 करोड़ 50 लाख रुपये की बिजली का निर्यात किया है। बाढ़ के कारण कुछ जलविद्युत परियोजनाओं का उत्पादन बंद होने से बिजली निर्यात प्रभावित हुआ। इसके बावजूद, पिछले साल सितंबर-अक्टूबर और चालू वित्त वर्ष के अगस्त महीने की तुलना में इस साल 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक बिजली निर्यात से होने वाला कारोबार बढ़ा है। इस बीच, भारत के ट्रांसमिशन सिस्टम का इस्तेमाल कर बांग्लादेश को की जाने वाली 40 मेगावाट बिजली की आपूर्ति भी दोबारा शुरू हो गई है।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के विद्युत प्रणाली संचालन विभाग (लोड डिस्पैच सेंटर) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में भारत को कुल 63 करोड़ 39 लाख 86 हजार 8 यूनिट बिजली निर्यात की गई। इस बिजली की बिक्री से 592 करोड़ 50 लाख रुपये का कारोबार हुआ। सितंबर-अक्टूबर महीने में भारत को दो माध्यमों से बिजली बेची गई। द्विपक्षीय बिजली बिक्री समझौते के तहत भारत के हरियाणा और बिहार राज्यों को बिजली की आपूर्ति की गई। शेष बिजली भारतीय ऊर्जा विनिमय बाजार (आईईएक्स) के डे-अहेड और रियल-टाइम बाजार में प्रतिस्पर्धी दरों पर बेची गई।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण घरेलू मांग पूरी करने के बाद बचने वाली मानसूनी बिजली हर साल भारत और बांग्लादेश को निर्यात करता है। द्विपक्षीय मध्यम अवधि के बिजली बिक्री समझौते के तहत हरियाणा और बिहार को जून से अक्टूबर तक बिजली बेची जाती है। पिछले साल 2025 में 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक भारत को बिजली निर्यात से 496 करोड़ 30 लाख रुपये का कारोबार हुआ था। वहीं, चालू वित्त वर्ष के जुलाईमे-अगस्त महीने में यह राशि 509 करोड़ 25 लाख रुपये थी।
इस तरह, पिछले साल के सितंबर अक्टूबर महीने की तुलना में इस साल इसी अवधि में बिजली निर्यात का कारोबार 96 करोड़ 20 लाख रुपये बढ़ा है। वहीं, जुलाई अगस्त महीने की तुलना में इसमें 83 करोड़ 25 लाख रुपये की वृद्धि हुई है। चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों—अगस्त से 25 अक्टूबर तक में बिजली निर्यात से कुल 1,615 करोड़ 13 लाख नेपाली रुपये का कारोबार हुआ है।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक दीर्घायु कुमार श्रेष्ठ ने बताया कि बाढ़ के कारण निर्यात की अनुमति प्राप्त कुछ जलविद्युत परियोजनाओं का उत्पादन बंद होने के बावजूद अक्टूबर महीने में बिजली निर्यात से होने वाला कारोबार बढ़ा है। उनके अनुसार, इस महीने भारत को निर्यात की गई कुल बिजली में से लगभग दो-तिहाई बिजली द्विपक्षीय समझौते के तहत बेची गई, जबकि शेष बिजली आईईएक्स के माध्यम से बेची गई। उधर, नेपाल से भारत के ट्रांसमिशन नेटवर्क के जरिए बांग्लादेश को की जाने वाली 40 मेगावाट बिजली की आपूर्ति पिछले शुक्रवार, 23 अक्टूबर की शाम से फिर शुरू हो गई है।
26 अगस्त को रसुवा में भोटेकोशी नदी में त्रिशूली नदी में बाढ़ आ गई थी। इससे बांग्लादेश को बिजली निर्यात की अनुमति प्राप्त त्रिशूली और चिलिमे जलविद्युत केंद्रों को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद बिजली निर्यात रोक दिया गया था। बाढ़ के कारण द्विपक्षीय समझौते के तहत स्वीकृत जलविद्युत केंद्रों को नुकसान पहुंचने से भारत के हरियाणा राज्य को होने वाला बिजली निर्यात भी आंशिक रूप से प्रभावित हुआ था। कार्यकारी निदेशक श्रेष्ठ ने बताया कि भारत के केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से अन्य जलविद्युत केंद्रों में उत्पादित बिजली बांग्लादेश को निर्यात करने की अनुमति मिलने के बाद आपूर्ति फिर शुरू की गई है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं के उत्पादन और ट्रांसमिशन ढांचे को नुकसान पहुंचने के बावजूद अन्य परियोजनाओं से बिजली निर्यात जारी रखना और बांग्लादेश को आपूर्ति फिर शुरू होना नेपाल के बिजली व्यापार के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनके अनुसार, इससे मानसून के दौरान उत्पादित अतिरिक्त बिजली के लिए बाजार प्रबंधन करने और क्षेत्रीय बिजली व्यापार का विस्तार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था के तहत त्रिशूली, देवीघाट और चिलिमे जलविद्युत केंद्रों के स्थान पर सोलु, काबेली-1 और लोअर मोदी जलविद्युत केंद्रों से उत्पादित बिजली बांग्लादेश और हरियाणा को निर्यात करने की अनुमति मिली है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण और बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (बीपीडीबी) के बीच 3 अक्टूबर 2024 को मानसूनी बिजली निर्यात के संबंध में पांच साल का समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार, हर साल 15 जून से 15 नवंबर तक छह महीने की अवधि में नेपाल से प्रतिदिन 40 मेगावाट बिजली बांग्लादेश को निर्यात की जाती है।
इस बीच, भारत के केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से नेपाल को अतिरिक्त 31 मेगावाट बिजली निर्यात करने की अनुमति मिली है। इस नई अनुमति के साथ भारत को बिजली निर्यात के लिए स्वीकृत कुल क्षमता लगभग 1,179 मेगावाट पहुंच गई है।

