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नेपाल में आज टीका का पर्व : देवी का प्रसाद ग्रहण करने और बड़ों से आशीर्वाद लेने का विशेष दिन

काठमांडू, 21 अक्टूबर । नेपाल में विजयादशमी का दिन हिंदू धर्मावलंबियों का प्रमुख त्योहार होने के साथ-साथ आज से पूर्णिमा तक टीका का पर्व भी मनाया जाता है। इसके लिए नेपाल सरकार द्वारा पूर्णिमा तक सरकारी अवकाश देने की परंपरा है। टीका का पर्व नेपाली समाज में देवी की पूजा-अर्चना के बाद घर परिवार समाज में अपनों से बड़े के हाथ से टीका का प्रसाद और आशीर्वाद ग्रहण करने का विशेष दिन भी है।

उपप्राध्यापक डॉ. नारायणप्रसाद निरौला के अनुसार, विजयादशमी का मूल भाव देवी भगवती का प्रसाद ग्रहण करना और मान्यजनों से आशीर्वाद लेना है। नवरात्र के दौरान की जाने वाली पूजा-अर्चना का समापन दशमी के दिन विसर्जन के साथ होता है। इसके बाद टीका और जमरा ग्रहण करने की परंपरा है।

निरौला ने कहा, “विजयादशमी के दिन विशेष रूप से भगवती का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। नवरात्र के दौरान देवी की आराधना से प्राप्त प्रसाद ग्रहण करने के लिए यह उत्तम समय है।” उन्होंने बताया कि सप्तमी के दिन फूलपाती से लेकर नवमी तक विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और दशमी के दिन टीका, जमरा तथा प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा है।

उनके अनुसार, लाल टीका शक्ति, शुभता और मंगल का प्रतीक है। देवी को लाल रंग प्रिय माना जाता है, इसलिए शक्ति की उपासना की परंपरा में लाल टीका लगाने का चलन है। हालांकि, कुछ समुदायों में स्थानीय और कुल परंपराओं के अनुसार सफेद टीका लगाने की प्रथा भी है। घटस्थापना के दिन बोकर उगाए गए जमरा को भी देवी का प्रिय और पवित्र प्रसाद माना जाता है।

निरौला ने बताया कि विजयादशमी स्वयं में एक शुभ दिन है। इसलिए इस दिन टीका और प्रसाद ग्रहण करने के लिए किसी विशेष मुहूर्त की प्रतीक्षा करना अनिवार्य नहीं है। शास्त्रों में विजयादशमी को सभी कार्यों की सिद्धि के लिए उत्तम समय बताया गया है।

दशैं के दौरान दिए जाने वाले आशीर्वाद का भी विशेष महत्व है। “आयुर्द्रोणसुते श्रियो दशरथे, शत्रुक्षयो राघवे, ऐश्वर्यं नहुषे, बलं हलधरे, सत्यञ्च कुन्तीसुते, विज्ञानं विदुरे, कीर्तिश्च नारायणे” जैसे आशीर्वचनों के माध्यम से दीर्घायु, समृद्धि, शत्रुओं के नाश, ऐश्वर्य, शक्ति, सत्यनिष्ठा, ज्ञान और कीर्ति की कामना की जाती है।

इस प्रकार, विजयादशमी केवल टीका और जमरा लगाने का त्योहार नहीं है, बल्कि देवी की आराधना का प्रसाद ग्रहण करने, शक्ति एवं शुभता की कामना करने और बड़ों से आशीर्वाद लेने का महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर भी है।

टीका लगाने के बाद घर परिवार के बड़े सदस्य अपने से छोटे सदस्य को टीका लगाने के बाद आशीर्वाद के रूप में फल मिठाई और दक्षिणा देने की भी परंपरा है। हर व्यक्ति यह प्रयास करता है कि वह इन पांच दिनों में अपने सभी रिश्तेदारों, परिजनों के घर पहुंचे और उनसे टीका ग्रहण करे।