हिमालयी सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल रूप में सहेजने के लिए साथ आए रॉयल एनफील्ड, विकिमीडिया और आईआईआईटी हैदराबाद
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर । भारतीय हिमालयी क्षेत्र की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) को डिजिटल रूप में संरक्षित करने और दुनिया भर के लोगों के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से रॉयल एनफील्ड सोशल मिशन, विकिमीडिया फाउंडेशन और आईआईआईटी हैदराबाद ने त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल के तहत हिमालयी क्षेत्रों की जीवित सांस्कृतिक परंपराओं, लोक ज्ञान, कौशल और प्रथाओं से जुड़ी सामग्री को मुक्त रूप से विकिमीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा।
रॉयल एनफील्ड सोशल मिशन (आरईएसएम), विकिमीडिया फाउंडेशन और आईआईआईटी हैदराबाद के बीच हुए इस समझौते के तहत हिमालयी क्षेत्र की 150 से अधिक अमूर्त सांस्कृतिक विरासत प्रथाओं से जुड़ी करीब एक हजार उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें, वीडियो और शोध सामग्री विकिमीडिया कॉमन्स पर उपलब्ध कराई जाएगी। आईआईआईटी हैदराबाद का ओपन नॉलेज इनिशिएटिव कार्यक्रम तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण देगा, जिससे विकिमीडिया स्वयंसेवक इन सामग्रियों को हिंदी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं की विकिपीडिया और अन्य विकिमीडिया परियोजनाओं पर साझा कर सकें। यह घोषणा 17 अक्टूबर को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत दिवस से पहले की गई है।
अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में पारंपरिक ज्ञान, अभिव्यक्तियां, कौशल, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परंपराएं शामिल हैं, जो पीढ़ियों से हिमालयी समुदायों की पहचान का हिस्सा रही हैं। इन 150 से अधिक सांस्कृतिक परंपराओं का दस्तावेजीकरण पिछले चार वर्षों से रॉयल एनफील्ड सोशल मिशन की प्रमुख पहल ‘द ग्रेट हिमालयन एक्सप्लोरेशन’ के तहत किया गया है, जो यूनेस्को और रॉयल एनफील्ड की संयुक्त परियोजना है। फिलहाल इसमें लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड, असम और उत्तर बंगाल समेत 11 क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
आइशर ग्रुप फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक बिदिशा डे ने कहा कि वर्ष 2022 से रॉयल एनफील्ड सोशल मिशन यूनेस्को के सहयोग से हिमालयी समुदायों की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेजीकरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये परंपराएं केवल सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के अनुरूप जीवनशैली विकसित करने वाले महत्वपूर्ण ज्ञान भंडार भी हैं। विकिमीडिया के साथ यह साझेदारी समुदायों को अपनी विरासत वैश्विक मंचों पर साझा करने का अवसर देगी।
विकिमीडिया फाउंडेशन में दक्षिण एशिया क्षेत्रीय साझेदारी प्रमुख प्रवीण दास ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल अतीत को सुरक्षित रखने का प्रयास नहीं है, बल्कि समुदायों और उनके ज्ञान को भविष्य में भी स्थान दिलाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र के जीवित ज्ञान और परंपराओं का डिजिटल दुनिया में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और यह पहल उस कमी को दूर करने में मदद करेगी।
आईआईआईटी हैदराबाद के ओपन नॉलेज इनिशिएटिव के मुख्य वास्तुकार तनवीर हसन ने कहा कि यह साझेदारी ज्ञान, तकनीक और भारत की विविध भाषाई समुदायों को एक मंच पर लाने का काम करेगी। इससे अधिक लोग अपनी भाषा में इस सामग्री से जुड़ सकेंगे और स्थानीय विरासत को वैश्विक मंच पर बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया जा सकेगा।
साझेदार संस्थाओं ने बताया कि इस पहल को दीर्घकालिक और समुदाय आधारित बनाए रखने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और एडिट-ए-थॉन जैसे आयोजन भी किए जाएंगे, ताकि स्वयंसेवक और स्थानीय समुदाय हिमालयी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े ज्ञान का दस्तावेजीकरण और विस्तार करते रहें।

