मन के जख्म पर प्यार का लेप !ठाणे मेन्टल में नुक्कड़ नाटक से सन्देश
मुंबई, 10 अक्टूबर I कभी -कभी दवाओं के साथ-साथ मन के ज़ख्मों के लिए प्यार का टच भी ज़रूरी है। मेंटल बीमारियों के बारे में गलतफहमियों को दूर करने और मरीज़ों को इज्ज़त से जीने में मदद देने के लिए, ठाणे के रीजनल साइकेट्रिक हॉस्पिटल ने वर्ल्ड मेंटल हेल्थ वीक के मौके पर कई अवेयरनेस एक्टिविटीज़ कीं। मरीज़ों का दर्द समझें, उन्हें ठुकराएँ नहीं, बल्कि इंसानियत का हाथ बढ़ाएँ, यह सवेदनशील सन्देश इन गतिविधि के ज़रिए दिया गया।
हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट, डॉ. नेताजी मुलिक की अध्यक्षता में हुए इस प्रोग्राम में चीफ डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज और चेयरमैन, मेंटल हेल्थ रिव्यू बोर्ड, ठाणे, आर. डी. सावंत चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए। ठाणे जिला न्यायाधीश -1 और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जज बी. डी. शेल्के और विधि प्राधिकरण सचिव , रवींद्र पजंकर विशेष अतिथि थे।
प्रोग्राम की शुरुआत मेंटल हेल्थ पर एक पोस्टर एग्ज़िबिशन से हुई, जिसे विद्यार्थी ने ‘लिव्ड एक्सपीरियंस, हर्ड रियल वॉयसेज़, रियल चेंज’ थीम पर तैयार किया था। इसके बाद हॉस्पिटल की सिस्टर-इन-चार्ज और डीपीन कॉलेज के विद्यार्थी ने दो सड़क नुक्कड़ पेश किए, जिसमें मेंटल बीमारियों से जूझ रहे लोगों के अनुभव, सोशल स्टिग्मा, रोज़मर्रा की मुश्किलें और इलाज के साथ प्यार और सहयोग की अहमियत को अच्छे से दिखाया गया।
मुख्य अतिथि आर. डी. सावंत ने मेंटल हेल्थ और कानून के बीच के रिश्ते को समझाया और मेंटल बीमारियों से परेशान लोगों को मिलने वाले कानूनी अधिकारों, इंसानी इज्ज़त और सुरक्षा के बारे में हिस्सा लेने वालों को गाइड किया। उन्होंने अपील की कि मेंटल हेल्थ अवेयरनेस एक दिन या एक हफ़्ते तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बननी चाहिए।
प्रोग्राम का अंत मेंटल हेल्थ अवेयरनेस रैली के साथ हुआ। चीफ गेस्ट ने हरी झंडी दिखाकर रैली शुरू की। ठाणे शहर में हुई इस रैली में मेंटल बीमारियों के बारे में गलतफहमियों को दूर करने, मरीज़ों के साथ भेदभाव से बचने और उन्हें इज्ज़त से जीने में मदद करने की अपील की गई।
ठाणे मनोरोग अस्पताल के अधीक्षक डॉ नेताजी मुलिक ने कहा कि – दिमागी बीमार मरीज़ों को दवा के साथ प्यार, प्यार और समझ की भी ज़रूरत होती है। यह हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि हम उनके अनुभव, समस्याओं और मुश्किलों को समझें, उसके हिसाब से इलाज और सेवाओं में ज़रूरी बदलाव करें, और उन्हें सम्मान के साथ जीने में मदद करें।

