भारत-स्विट्जरलैंड ने कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए किए समझौते
भारत और स्विट्जरलैंड ने सोमवार को टिकाऊ बुनियादी ढांचे, युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान, नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन ने नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में मुलाकात कर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान (YPS) से जुड़े समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के युवाओं को दूसरे देश में अस्थायी रोजगार के अवसर देना है। इससे उन्हें अपने क्षेत्र में पेशेवर और भाषा संबंधी कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी।
समझौते के तहत हर देश से सालाना 300 युवा पेशेवरों का आदान-प्रदान किया जा सकेगा। यह संख्या बढ़ाकर 500 तक की जा सकती है। इसके अलावा राष्ट्रीयता और निवास स्थिति के सत्यापन के लिए 30 से 90 दिनों की समयसीमा समेत कई अन्य प्रावधान किए गए हैं।
‘परिवहन प्रौद्योगिकियों के संवर्धन और सहयोग’ से जुड़े MoU का उद्देश्य टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास में सहयोग बढ़ाना है। इसके तहत परिवहन और आवाजाही से जुड़ी प्रणालियों में इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, चक्रीय अर्थव्यवस्था, सुरंग और अन्य परिवहन क्षेत्रों की तकनीकों एवं बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन (SNSF) के बीच हस्ताक्षरित आशय पत्र (LoI) का उद्देश्य दोनों देशों के शोध समुदायों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके तहत शुरुआती स्तर के वैज्ञानिक सहयोग, भविष्य के संयुक्त शोध के लिए साझेदारी और साझा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए व्यापक ढांचा तैयार किया जाएगा।
इसके अलावा, एक कार्यान्वयन व्यवस्था (IA) के जरिए नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत शुरुआती चरण के स्टार्टअप के लिए Indo-Swiss Academia-Industry Training (AIT India) कार्यक्रम लागू किया जाएगा। इसमें दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यशालाएं, क्षमता निर्माण और संपर्क बढ़ाने जैसी गतिविधियां शामिल होंगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड जल्द ही स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नए संयुक्त शोध प्रोजेक्ट शुरू करेंगे। उन्होंने भारत के विज्ञान आधारित स्टार्टअप की क्षमता बढ़ाने के लिए ज्यूरिख विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते का भी स्वागत किया।
भारत 7 अक्टूबर को भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के कारोबारी नेताओं के साथ ‘Prosperity Summit’ आयोजित करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सम्मेलन भारत-EFTA व्यापार और निवेश साझेदारी की संभावनाओं को ठोस परिणामों में बदलने के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।

