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संदिग्ध विदेशी धन प्रेषण पर आयकर विभाग का देशव्यापी सत्यापन अभियान शुरू

आयकर विभाग ने संदिग्ध विदेशी धन प्रेषण (Suspicious foreign remittances) के मामलों को लेकर देशव्यापी सत्यापन अभियान शुरू किया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अनुसार, विभाग ने ऐसी कई संस्थाओं की पहचान की है, जिन्होंने बेहद कम या शून्य कारोबार दिखाने के बावजूद बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा विदेश भेजी।

CBDT ने बताया कि यह कार्रवाई पिछले तीन वर्षों में विदेश भेजे गए धन से संबंधित आंकड़ों के विश्लेषण और जमीनी स्तर से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई। जांच के दौरान फर्जी धर्मार्थ ट्रस्टों से जुड़े एक नेटवर्क का भी पता चला, जो कथित तौर पर फर्जी दान और योगदान के बदले बोगस एंट्री उपलब्ध कराने में शामिल था।

प्रारंभिक सत्यापन में पाया गया कि विदेशी धन भेजने वाली कई संस्थाओं ने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया था या बेहद कम कारोबार घोषित किया था। उनके घोषित कारोबार और विदेश भेजी गई बड़ी रकम के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला।

CBDT के अनुसार, विदेशी प्रेषण के लिए बताए गए कारणों- जैसे माल ढुलाई, सॉफ्टवेयर आयात और परामर्श सेवाओं के भुगतान का भी इन संस्थाओं की वित्तीय स्थिति से मेल नहीं था। जांच में यह भी सामने आया कि कई संस्थाएं अपने घोषित पते पर वास्तव में संचालित नहीं हो रही थीं।

विभाग ने पाया कि Form 15CB के बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र कुछ सीमित पेशेवरों द्वारा जारी किए गए थे, जबकि धन प्राप्त करने वाली संस्थाएं भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई थीं। इससे प्रमाणपत्र जारी करने से पहले पर्याप्त जांच-पड़ताल किए जाने को लेकर सवाल उठे हैं।

मंगलवार को शुरू किए गए देशव्यापी अभियान में शेल कंपनियों, उनके पीछे मौजूद व्यक्तियों और Form 15CB जारी करने वाले पेशेवरों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भूमि सीमाओं से लगे राज्यों के जिलों में स्थित और बड़ी रकम विदेश भेजने वाली संस्थाओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

अब तक लगभग 394 संस्थाओं और 36 पेशेवरों का सत्यापन किया जा चुका है। इनमें भूमि-सीमा वाले राज्यों की 117 संस्थाएं शामिल हैं।

CBDT ने कहा कि Form 15CB/Form 146 जारी करने वाले अकाउंटेंट को संबंधित लेनदेन और दस्तावेजों की पर्याप्त जांच, सावधानी और पेशेवर निर्णय के बाद ही प्रमाणपत्र जारी करना चाहिए। मामले में आगे की जांच जारी है।