C2S कार्यक्रम से भारत का चिप डिजाइन मजबूत
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि ‘चिप्स टू स्टार्ट-अप्स’ यानी C2S कार्यक्रम भारत को सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत अब तक देशभर में 68 हजार से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि विभिन्न सहभागी संस्थानों ने 254 चिप डिजाइनों का सफलतापूर्वक टेप-आउट किया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संचालित C2S कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करना और देश में डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत करना है। कार्यक्रम के माध्यम से बीटेक, एमटेक और पीएचडी स्तर पर सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन में विशेषज्ञता रखने वाले 85 हजार उद्योग-योग्य पेशेवर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम के तहत देशभर के 332 शैक्षणिक संस्थानों को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन यानी EDA टूल्स तक पहुंच उपलब्ध कराई गई है। इन टूल्स के जरिए छात्रों और शोधकर्ताओं को चिप डिजाइन की वास्तविक औद्योगिक प्रक्रिया को समझने और उस पर व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर मिल रहा है। इससे अकादमिक शिक्षा को वास्तविक चिप विकास से जोड़ने में मदद मिली है।
C2S कार्यक्रम के तहत अब तक तैयार किए गए 254 चिप डिजाइनों में से 175 डिजाइन मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी के 180-नैनोमीटर टेक्नोलॉजी नोड पर तैयार किए गए हैं। इसके अलावा 79 डिजाइन विदेशों में स्थित सेमीकंडक्टर फाउंड्री में तैयार किए गए हैं। यह उपलब्धि भारत में चिप डिजाइन से जुड़े अनुसंधान और नवाचार की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
आंध्र प्रदेश में भी बढ़ रहा C2S का दायरा
आंध्र प्रदेश में भी C2S कार्यक्रम ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। राज्य के 23 शैक्षणिक संस्थानों को उन्नत EDA टूल्स की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन संस्थानों ने मिलकर 4.34 लाख से अधिक टूल-घंटों का उपयोग किया है। इससे छात्रों और शोधकर्ताओं को उद्योग स्तर के चिप डिजाइन प्लेटफॉर्म पर काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है।
सेमीकंडक्टर अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आंध्र प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में चार अनुसंधान परियोजनाओं को वित्तीय सहायता भी दी गई है। इन परियोजनाओं में आधुनिक तकनीक और विभिन्न उभरते क्षेत्रों से जुड़े समाधान विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
आईआईटी तिरुपति में शोधकर्ता क्रिप्टोग्राफिक अनुप्रयोगों के लिए सुरक्षित RISC-V प्रोसेसर विकसित करने पर काम कर रहे हैं। वहीं IIITDM कुरनूल में उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग और साइबर-फिजिकल सिस्टम के लिए हार्डवेयर एक्सेलेरेटर विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है।
NIT आंध्र प्रदेश में शोधकर्ता इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी IoT अनुप्रयोगों के लिए ऊर्जा-कुशल न्यूरोमॉर्फिक प्रोसेसर विकसित करने पर केंद्रित हैं। वहीं श्री विष्णु इंजीनियरिंग कॉलेज फॉर विमेन, भीमावरम में एज AI अनुप्रयोगों के लिए मेमोरी-कुशल को-प्रोसेसिंग यूनिट विकसित की जा रही है।
इन सभी परियोजनाओं पर फिलहाल डिजाइन और विकास के अलग-अलग चरणों में काम चल रहा है। परियोजनाओं की तकनीकी परिपक्वता और दायरे के आधार पर इन्हें आगे प्रोटोटाइप परीक्षण तथा उपयुक्त मामलों में सेमीकंडक्टर फाउंड्री में टेप-आउट की दिशा में ले जाने की योजना है।
C2S कार्यक्रम भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए प्रतिभा, अनुसंधान और नवाचार का मजबूत आधार तैयार कर रहा है। छात्रों को अत्याधुनिक डिजाइन टूल्स और वास्तविक चिप विकास का अनुभव मिलने से देश में कुशल इंजीनियरों की नई पीढ़ी तैयार हो रही है। आने वाले समय में यह पहल भारत की चिप डिजाइन क्षमता को मजबूत करने और वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में देश की भूमिका बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

