कृषि से स्वास्थ्य तक, भारत में AI के फायदे दिखे
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत में किसानों की आय और फसल प्रबंधन से लेकर टीबी की जांच और कृषि संबंधी सवालों के जवाब देने तक कई क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो रही है। हालांकि, इससे कॉल सेंटर और शुरुआती स्तर की तकनीकी नौकरियों पर दबाव बढ़ने का खतरा भी है। विश्व बैंक ने अपनी वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 में यह बात कही है।
रिपोर्ट में भारत को कम लागत और व्यावहारिक AI के इस्तेमाल के प्रमुख उदाहरणों वाले देशों में शामिल किया गया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में AI के कारण कॉल सेंटर और बैक-ऑफिस के काम स्वचालित होने से रोजगार पर असर पड़ सकता है।
किसानों के लिए AI से फायदा
विश्व बैंक के अनुसार, तेलंगाना में AI आधारित मौसम पूर्वानुमान प्रणाली ने छोटे किसानों को मौसम से जुड़े जोखिमों के अनुसार अपने फैसले बदलने में मदद की। कुछ किसानों ने कृषि पर खर्च एक-तिहाई तक बढ़ाया, जबकि अन्य किसानों को प्रति किसान 560 डॉलर तक की शुद्ध बचत हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देशों में AI से लाभ की संभावनाएं विकसित देशों की तुलना में अधिक हैं। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में 10 फीसदी से कम नौकरियां AI से स्वचालित होने के जोखिम में हैं, जबकि उच्च आय वाले देशों में यह आंकड़ा एक-तिहाई से अधिक है। वहीं, विकासशील देशों में करीब 16.2 फीसदी नौकरियों में AI के जरिए उत्पादकता बढ़ने की संभावना है।
लाखों किसानों तक पहुंची AI सलाह
रिपोर्ट में ओडिशा की आमा कृषि, जिसे अब कृषि समृद्धि के नाम से संचालित किया जा रहा है, का भी उल्लेख किया गया है। 2018 में शुरू हुई इस पहल में AI आधारित कृषि सलाह सेवाएं शामिल की गई हैं।
2022 में सरकारी स्वामित्व में आने के समय करीब 30 लाख किसानों तक पहुंचने वाली यह सेवा अब 70 लाख से अधिक किसानों तक पहुंच चुकी है। 2025 के एक मूल्यांकन के अनुसार, इस सेवा से खेती के तरीकों में सुधार, पैदावार में वृद्धि और गंभीर फसल नुकसान में कमी आई। इसका लाभ-लागत अनुपात 9:1 से 15:1 के बीच रहा।
वहीं, किसान ई-मित्र कृषि शिकायत संबंधी चैटबॉट 11 भारतीय भाषाओं में तत्काल जवाब देता है। उन्नत AI सुविधाएं जोड़े जाने के बाद 186 दिनों में इसने करीब 27 लाख सवालों का जवाब दिया, जो पारंपरिक मैनुअल प्रक्रिया की क्षमता से लगभग सात गुना अधिक है।
टीबी जांच में भी AI का इस्तेमाल
विश्व बैंक ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी AI के इस्तेमाल को रेखांकित किया। Wadhwani AI और भारत सरकार के केंद्रीय टीबी प्रभाग द्वारा विकसित Cough Against TB ने खांसी की आवाज के आधार पर जांच करते हुए उन 10 में से करीब नौ लोगों की सही पहचान की, जिन्हें आगे पुष्टि संबंधी जांच की जरूरत थी।
महाराष्ट्र में सरकार के एक आकलन में पाया गया कि टीबी की जांच के लिए एक्स-रे की कंप्यूटर आधारित जांच रेडियोलॉजिस्ट की जांच की तुलना में अधिक सटीक और कम खर्चीली थी। तमिलनाडु में भी डायबिटिक रेटिनोपैथी की बड़े पैमाने पर AI आधारित जांच शुरू की गई है।
रोजगार पर मंडराता खतरा
हालांकि, विश्व बैंक ने चेतावनी दी कि AI भारत में मध्यम वर्ग के रोजगार तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण रास्ता प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर कॉल सेंटर, सॉफ्टवेयर, वित्त और बिजनेस सर्विसेज में शुरुआती स्तर की नौकरियां जोखिम में आ सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की एक बिजनेस-प्रोसेस आउटसोर्सिंग कंपनी में AI ने ऐसा काम करने की क्षमता हासिल कर ली, जिसे वहां के ग्राहक सेवा कर्मचारी पहले से करते थे। यह दिखाता है कि एक जगह AI कर्मचारियों की क्षमता बढ़ा सकता है, जबकि दूसरी जगह वही तकनीक रोजगार को विस्थापित कर सकती है।
स्थानीय जरूरतों के मुताबिक AI पर जोर
विश्व बैंक ने भारत को उन विकासशील देशों में भी शामिल किया जो स्थानीय भाषाओं और परिस्थितियों के अनुरूप AI सिस्टम विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के IndiaAI Mission के तहत Sarvam AI को घरेलू AI मॉडल विकसित करने के लिए चुना गया है। कंपनी भारत में ही प्रशिक्षित 30 अरब और 105 अरब पैरामीटर वाले मॉडल विकसित करने की योजना बना रही है।
रिपोर्ट में भारत के Unified Payments Interface (UPI) को डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के उदाहरण के तौर पर भी पेश किया गया है, जो बैंकों, फिनटेक कंपनियों और भुगतान ऐप को एक साझा व्यवस्था पर काम करने की सुविधा देता है।
विश्व बैंक ने विकासशील देशों को मौजूदा AI तकनीकों को अपनाने, उन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढालने और संसाधन उपलब्ध होने पर घरेलू क्षमता विकसित करने पर ध्यान देने की सलाह दी है।
रिपोर्ट में कहा गया कि छोटे AI सिस्टम मोबाइल फोन और लैपटॉप पर ऑफलाइन भी चल सकते हैं तथा जहां बिजली और इंटरनेट की सुविधा सीमित है, वहां वॉयस कॉल और टेक्स्ट मैसेज के जरिए भी AI सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।
वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर AI के प्रभाव का विश्व बैंक का पहला व्यापक आकलन है। विश्व बैंक के अनुसार, AI विकासशील देशों को ऐसी प्रगति हासिल करने में सक्षम बना सकता है, जिसमें सामान्य परिस्थितियों में एक सदी लग सकती है। हालांकि, इसके लिए विश्वसनीय बिजली, सस्ता इंटरनेट, स्थानीय भाषाओं में डेटा, कुशल कर्मचारियों और भेदभाव, गलत सूचना तथा विदेशी तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता से बचाव के उपाय जरूरी होंगे।

