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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर 22 बुनकरों और संस्थाओं को मिलेगा सम्मान, राष्ट्रपति करेंगी पुरस्कार वितरण

नई दिल्ली में 7 अगस्त 2026 को 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाएगा। वस्त्र मंत्रालय की ओर से राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (आरबीसीसी) में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी और वर्ष 2025 के संत कबीर हथकरघा पुरस्कार तथा राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान करेंगी। समारोह में भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को संरक्षित करने और देश के सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास में बुनकर समुदाय के योगदान को सम्मानित किया जाएगा।

22 प्रतिष्ठित पुरस्कार किए जाएंगे प्रदान

समारोह का मुख्य आकर्षण 22 पुरस्कारों का वितरण होगा। इनमें 3 संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार शामिल हैं। ये पुरस्कार बुनाई, नवाचार, डिजाइन विकास, विपणन पहल, स्टार्टअप उद्यमों और उत्पादक कंपनियों के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य को सम्मानित करेंगे।

संत कबीर पुरस्कार सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान

संत कबीर हथकरघा पुरस्कार हथकरघा बुनकरों के लिए देश के सर्वोच्च सम्मानों में शामिल है। यह असाधारण कारीगरी, जीवनभर के समर्पण और भारत की बुनाई परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में निरंतर योगदान को मान्यता देता है।

राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार में नवाचार और गुणवत्ता पर जोर

राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार उन बुनकरों और अन्य संबंधित पक्षों को दिया जाता है, जिन्होंने पारंपरिक कौशल को संरक्षित रखते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाया और रचनात्मकता, गुणवत्ता, नवाचार तथा उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया। विजेताओं का चयन विशेषज्ञ समितियों वाली बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के जरिए किया जाता है, ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

राष्ट्रपति के साथ कई गणमान्य हस्तियां होंगी शामिल

समारोह में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह, वस्त्र राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा, वस्त्र सचिव नीलम शमी राव और विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना समेत संसद सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, हथकरघा उद्योग के प्रतिनिधि, मास्टर बुनकर, डिजाइनर, निर्यातक, कारीगर और पुरस्कार विजेता शामिल होंगे।

चार स्मारक डाक टिकट होंगे जारी

समारोह में भारत की विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए चार स्मारक डाक टिकट जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही ‘अर्थ. रूट. थ्रेड – ऑल डाइड हैंडलूम टेक्सटाइल्स ऑफ सेंट्रल इंडिया’ और ‘हैंडलूम अवार्ड्स बुक 2025’ नामक दो प्रकाशनों का अनावरण किया जाएगा।

पुरस्कार विजेता उत्पादों की लगेगी प्रदर्शनी

कार्यक्रम के दौरान पुरस्कार विजेता हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। पारंपरिक कानी बुनाई और वॉल हैंगिंग बुनाई के लाइव प्रदर्शन के जरिए आगंतुकों को भारत की हथकरघा परंपराओं की विविधता, कलात्मकता और कारीगरी से रूबरू कराया जाएगा।

देशभर में आयोजित होंगे विभिन्न कार्यक्रम

राष्ट्रीय समारोह के अलावा देशभर में हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रदर्शनियां, डिजाइनर सम्मेलन, आईआईएचटी सम्मेलन और अन्य प्रचार गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य भारत की जीवंत हथकरघा परंपराओं और बुनकर समुदाय के योगदान को व्यापक स्तर पर सामने लाना है।

35 लाख से अधिक लोगों की आजीविका का आधार

भारत का हथकरघा क्षेत्र टिकाऊ ग्रामीण रोजगार के प्रमुख स्रोतों में से एक है। यह 35 लाख से अधिक लोगों की आजीविका का समर्थन करता है, जिसमें 70% से अधिक कार्यबल महिलाएं हैं। यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान देने के साथ भारत की समृद्ध कपड़ा विरासत का संरक्षक और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन पद्धतियों का महत्वपूर्ण आधार भी है।

स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाता है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

हर साल 7 अगस्त को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 7 अगस्त 1905 को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाता है। इस आंदोलन ने स्वदेशी उद्योगों और भारत के हथकरघा क्षेत्र को नई गति दी थी। वर्ष 2015 में शुरुआत के बाद से यह दिवस देश के हथकरघा बुनकरों की कला, कौशल और समर्पण का उत्सव मनाने के साथ क्षेत्र के संरक्षण, संवर्धन और टिकाऊ विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराता रहा है।