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राष्ट्रपति मुर्मू ने उनके पद को महज एक सम्मान नहीं बल्कि एक गहन जिम्मेदारी बताया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन में अपने चार साल के कार्यकाल की पूर्ति के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष पुस्तक विमोचन समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने पांच स्मृति पुस्तकें जारी कीं। अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने इस उच्च संवैधानिक पद को महज सम्मान नहीं बल्कि एक गहन जिम्मेदारी बताया और कहा कि राष्ट्रपति भवन में उनका आगमन उनके व्यक्तिगत सपनों से भी कहीं अधिक था। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में उन्होंने युवाओं को नैतिक मूल्यों में दृढ़ रहने और राष्ट्र एवं समाज की प्रगति के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने महिलाओं से आत्मनिर्भर बनने और आत्मविश्वास के साथ प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने का आग्रह किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समुदायों को संबोधित करते हुए उन्होंने उनसे अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बनने का भी अनुरोध किया।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू ने आम जनता की भावनाओं को महत्व दिया और समावेशी भागीदारी पर जोर दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राष्ट्रपति मुर्मू ने गरिमा, विनम्रता, बुद्धिमत्ता और संविधान के अक्षरशः और भावना के प्रति प्रतिबद्धता से इस उच्च पद को सुशोभित किया है।