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राष्ट्रमंडल खेल 2026 : उद्घाटन के बाद मुकाबलों पर केंद्रित हुई टीम इंडिया

राष्ट्रमंडल खेल 2026 के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेने के 12 घंटे से भी कम समय बाद भारतीय दल ने उत्सव के माहौल को पीछे छोड़ते हुए अपना पूरा ध्यान प्रतियोगिताओं पर केंद्रित कर दिया। शुक्रवार को ग्लासगो में खेलों के पहले पूर्ण प्रतिस्पर्धी दिन के साथ विभिन्न स्पर्धाओं का आगाज हुआ और भारतीय खिलाड़ी अपने-अपने मुकाबलों की तैयारियों में जुट गए।

खिलाड़ियों ने शुरू की अंतिम तैयारियां

रंगारंग उद्घाटन समारोह के बाद खिलाड़ी, कोच और सहयोगी स्टाफ तुरंत अपनी नियमित प्रतिस्पर्धी तैयारियों में लग गए। प्रशिक्षण स्थलों, रिकवरी सेंटरों और टीम के ठहरने के स्थानों पर अभ्यास का सिलसिला फिर से शुरू हो गया। कोचों ने प्रतियोगिताओं की रणनीति को अंतिम रूप दिया, जबकि फिजियोथेरेपिस्ट खिलाड़ियों की रिकवरी पर नजर रखते रहे। पोषण विशेषज्ञ व्यक्तिगत आहार योजना की निगरानी करते रहे और टीम प्रबंधकों ने सभी व्यवस्थाओं का समन्वय किया, ताकि खिलाड़ी अपने मुकाबलों के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

कॉम्पैक्ट प्रारूप से मिला अतिरिक्त समय

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों का प्रारूप पिछले कई बहु-खेल आयोजनों की तुलना में अधिक कॉम्पैक्ट है। अधिकांश प्रतियोगिता स्थल एक-दूसरे के निकट स्थित हैं। मौजूदा खेल बुनियादी ढांचे के उपयोग से खिलाड़ियों का यात्रा समय कम हुआ है, जिससे उन्हें अभ्यास, रिकवरी और प्रतियोगिता की तैयारी के लिए अधिक समय मिल रहा है।

तकनीकी और रणनीतिक तैयारियों पर जोर

भारतीय दल ने पूरे आयोजन के दौरान अनुशासित और पेशेवर दृष्टिकोण अपनाया है। खिलाड़ी और कोच औपचारिक समारोहों की बजाय तकनीकी तैयारियों, रणनीति और प्रतियोगिता कार्यक्रम पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, ताकि प्रदर्शन बेहतर किया जा सके।

विशेषज्ञों की टीम दे रही है हर स्तर पर सहयोग

भारतीय दल के साथ डॉक्टरों, फिजियोथेरेपिस्टों, स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग विशेषज्ञों, टीम प्रबंधकों और लॉजिस्टिक्स कर्मियों की बहु-विषयक टीम मौजूद है। यह टीम पूरे खेलों के दौरान खिलाड़ियों को चिकित्सा, फिटनेस और अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध करा रही है।

2030 अहमदाबाद राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भी मिलेगा अनुभव

भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) राष्ट्रीय खेल महासंघों, कोचों और आयोजकों के साथ मिलकर भारतीय दल की सुचारु भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। ग्लासगो में विश्वस्तरीय खेल परिसरों, प्रभावी परिवहन व्यवस्था और खिलाड़ी-केंद्रित आयोजन मॉडल से भारत को भी महत्वपूर्ण अनुभव मिलेगा। वर्ष 2030 में अहमदाबाद राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा, ऐसे में यह अनुभव भविष्य की तैयारियों के लिए उपयोगी साबित होगा।