न्यूजीलैंड क्रिकेट में दक्षिण एशियाई खिलाड़ियों का बढ़ता प्रभाव
स्पोर्ट्स: ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में दक्षिण एशियाई समुदाय तेजी से बढ़ते प्रवासी समूहों में शामिल है और इसका असर क्रिकेट पर भी साफ दिखाई दे रहा है। खासकर न्यूजीलैंड क्रिकेट ने इस बदलाव से काफी फायदा उठाया है।
सीमित आबादी और संसाधनों के बावजूद देश ने प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पहचानकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है। न्यूजीलैंड की आबादी लगभग 5.3 मिलियन है और न्यूजीलैंड क्रिकेट के पास वित्त वर्ष 2025 के लिए लगभग 37 मिलियन डॉलर का रिजर्व और 26.9 मिलियन डॉलर की फंडिंग है। ऐसे सीमित संसाधनों के बीच भी बोर्ड ने दक्षिण एशियाई मूल के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
इस लिस्ट में दीपक पटेल को शुरुआती मार्गदर्शक माना जाता है, जिन्होंने उपमहाद्वीप से आए खिलाड़ियों के लिए रास्ता खोला।
उनके बाद जीतन पटेल, जीत रावल, तरुण नेथुला, रॉनी हीरा, ईश सोढ़ी, एजाज पटेल, रचिन रवींद्र और आदित्य अशोक जैसे कई खिलाड़ियों ने न्यूजीलैंड टीम का प्रतिनिधित्व किया। हाल ही में लाहौर में जन्मे मोहम्मद अब्बास भी इस सूची में शामिल हुए हैं, जिन्हें मार्च 2025 में राष्ट्रीय टीम में जगह मिली।
अब्बास ने अपने पहले ही वनडे मैच में 24 गेंदों में अर्धशतक बनाकर नया रिकॉर्ड भी बनाया। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा समान अवसर मिला और टीम में किसी भी तरह का भेदभाव महसूस नहीं हुआ। अब्बास ने कहा, “मुझे भी उतना ही महत्व दिया गया जितना किसी और को दिया जाता है। यहां असली सवाल यह होता है कि आप टीम के लिए क्या योगदान दे सकते हैं।” उन्होंने बताया कि 16 साल की उम्र में ही उन्हें NZC के पाथवे प्रोग्राम में शामिल कर लिया गया था, जिसने उनके क्रिकेट करियर को मजबूत आधार दिया।
अब्बास ने अपने कोच दीपक पटेल को अपने करियर का सबसे बड़ा प्रभाव बताया। उन्होंने कहा कि हाई स्कूल टीम में कोच रहते हुए दीपक ने उनके खेल को निखारने और सीमाओं से आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आईपीएल को लेकर पूछे गए सवाल पर अब्बास ने कहा कि उन्होंने अभी किसी खास टीम को लेकर योजना नहीं बनाई है, लेकिन मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी टीमों को वे पसंद करते हैं।
साथ ही उन्होंने युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी की भी तारीफ की और उन्हें बेहतरीन प्रतिभा बताया। न्यूजीलैंड क्रिकेट में दक्षिण एशियाई खिलाड़ियों की यह बढ़ती मौजूदगी आने वाले समय में और अधिक विविधता और प्रतिस्पर्धा का संकेत देती है।

