महाराष्ट्र DGP का प्रस्ताव: पालघर-ठाणे में तटीय निगरानी के लिए 12 नई गश्ती नौकाएँ
समुद्री सुरक्षा और तटीय निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महाराष्ट्र में बड़ा कदम उठाया गया है। डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) कार्यालय ने राज्य सरकार को 12 नई हाई-स्पीड पेट्रोल बोट खरीदने का प्रस्ताव भेजा है। इन बोट्स का उद्देश्य पालघर और ठाणे जिलों की लंबी कोस्टलाइन पर निगरानी बढ़ाना और संदिग्ध समुद्री गतिविधियों पर सख्त नजर रखना है। प्रस्ताव के अनुसार, इन आधुनिक पेट्रोल बोट्स की तैनाती से तटीय सुरक्षा व्यवस्था में काफी सुधार होने की उम्मीद है। पालघर जिले में ज़ाई से वसई तक लंबा समुद्री तट फैला हुआ है, जबकि ठाणे जिले में मीरा-भायंदर क्षेत्र भी महत्वपूर्ण कोस्टल बेल्ट का हिस्सा है। इन इलाकों में लगातार बढ़ते समुद्री यातायात और संवेदनशील गतिविधियों को देखते हुए मजबूत निगरानी प्रणाली की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में कई पेट्रोल बोट पुरानी हो चुकी हैं और कुछ बोट किराए पर ली गई हैं। पुराने और लीज़ पर आधारित संसाधनों पर निर्भरता के कारण समुद्री पेट्रोलिंग की क्षमता और प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है। कई बार संसाधनों की कमी के चलते समय पर निगरानी और त्वरित कार्रवाई में भी बाधा आती है। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए 12 नई उन्नत पेट्रोल बोट्स खरीदने का प्रस्ताव दिया गया है। इनमें से चार बोट्स पालघर, विरार क्षेत्र और मीरा-भायंदर के लिए निर्धारित की गई हैं। इन बोट्स के शामिल होने से समुद्री निगरानी प्रणाली और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे कोस्टलाइन पर सुरक्षा का स्तर बढ़ेगा।
वर्तमान में समुद्री सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर व्यवस्था की जाती है। इसमें नियमित समुद्री गश्त, मरीन पुलिस स्टेशन, चेक पोस्ट, नाकाबंदी और ‘सागर कवच’ तथा ‘सागर सुरक्षा’ जैसे विशेष अभियान शामिल हैं। इन सभी प्रयासों का उद्देश्य समुद्री सीमा पर किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को रोकना है। संविधान और सुरक्षा ढांचे के अनुसार समुद्री सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी भारतीय नौसेना (Navy) की होती है। वहीं इंडियन कोस्ट गार्ड समुद्र के किनारे से दो नॉटिकल मील तक के क्षेत्र की निगरानी करता है। इसके अलावा राज्य की मरीन पुलिस 0 से 12 नॉटिकल मील के दायरे में गश्त और सुरक्षा कार्य संभालती है।
अधिकारियों का मानना है कि नई पेट्रोल बोट्स के शामिल होने से तटीय इलाकों में न सिर्फ निगरानी क्षमता बढ़ेगी, बल्कि आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय भी कम होगा। इससे अवैध गतिविधियों, तस्करी और अन्य समुद्री अपराधों पर भी नियंत्रण मजबूत किया जा सकेगा। सरकार द्वारा प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय जल्द लिए जाने की संभावना है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो आने वाले समय में महाराष्ट्र की कोस्टल सिक्योरिटी व्यवस्था को एक नया और आधुनिक स्वरूप मिल सकता है।

