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एनआईटी राउरकेला ने बनाया भावनाओं को समझने वाला संवादशील रोबोट

राउरकेला स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) ने एक मानव-सदृश सामाजिक रोबोट विकसित किया है, जो भावनाओं और हावभाव की पहचान कर स्वाभाविक बातचीत करने में सक्षम है।

इस रोबोट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLM) का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह:

  • रोजमर्रा की भाषा समझ सकता है,

  • मौखिक निर्देशों का पालन कर सकता है,

  • प्रश्नों के उत्तर दे सकता है,

  • और पूर्व-निर्धारित प्रतिक्रियाओं से परे वास्तविक समय में संवाद कर सकता है।

मानवीय भावनाओं और हावभाव की पहचान

रोबोट चेहरे के भावों—जैसे खुशी, उदासी या सामान्य स्थिति—का विश्लेषण कर सटीक भावनात्मक प्रतिक्रिया देता है।
यह हाथ हिलाने या उठाने जैसे सरल इशारों को भी पहचान सकता है, जिससे यह घरों, कक्षाओं, अस्पतालों, कार्यालयों और सामुदायिक स्थानों में उपयोग के लिए उपयुक्त बनता है।

एनआईटी राउरकेला के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुप नंदी ने बताया,
“यह स्वदेशी प्रणाली भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों के अनुरूप है। वैश्विक प्रणालियों के विपरीत, यह किफायती प्लेटफॉर्म भावना, हावभाव, भाषण और LLM आधारित संवाद को एकीकृत करता है।”

तकनीकी विवरण और पेटेंट

  • रोबोट रास्पबेरी पाई सेटअप का उपयोग करके आवाज या टेक्स्ट इनपुट को प्रोसेस करता है।

  • एलएलएम संदर्भ को समझकर मानव-समान प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न करता है।

  • आउटपुट गूगल टेक्स्ट-टू-स्पीच सिस्टम के माध्यम से प्रदान किया जाता है।

  • रोबोट में पहिए और दूरी-संवेदन मॉड्यूल हैं, जो भीड़भाड़ वाले वातावरण में सुरक्षित गतिशीलता सुनिश्चित करते हैं।

  • संस्थान ने इस नवाचार के लिए पेटेंट भी हासिल कर लिया है।

शोध पत्र के अनुसार, उत्पादन पैमाने और घटकों के अनुकूलन के आधार पर इस रोबोट की अनुमानित लागत ₹80,000 से ₹90,000 के बीच हो सकती है।

उपयोग की संभावनाएँ

इस रोबोट का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सामुदायिक सेवाओं और कार्यालयीन सहयोग में किया जा सकता है।
इसके माध्यम से संवादात्मक तकनीक और मानव-समान प्रतिक्रिया के क्षेत्र में भारत में स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।