National

विश्व में वृद्ध जनसंख्या बढ़ रही, सम्मान घट रहा

बुजुर्गों का सम्मान आज विश्वभर में कम होता जा रहा है, जिससे समाज में चिंता बढ़ रही है। वे लोग जिन्होंने जीवनभर संघर्ष कर अगली पीढ़ी के लिए रास्ते बनाए, अब अकेले और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। पारंपरिक परिवारिक ढांचा टूटने के कारण वे अब पहले जैसे सम्मान और स्नेह के पात्र नहीं रह गए हैं।

भारत, जहाँ सदियों से संयुक्त परिवार और बुजुर्गों के प्रति आदर की परंपरा रही है, अब भी इस समस्या से अछूता नहीं है। पहले जो बुजुर्ग परिवार की रीढ़ माने जाते थे, वे आज कई बार वृद्धाश्रमों में अकेलेपन का सामना कर रहे हैं।

विश्व स्तर पर वृद्ध जनसंख्या बढ़ रही है। 2006 में उनका हिस्सा 11% था, जो 2016 में 14% तक बढ़ गया। 2050 तक यह संख्या 22% तक पहुँचने का अनुमान है। 2030 तक वृद्धों की संख्या युवाओं से अधिक हो सकती है, खासकर विकासशील देशों में।

बुजुर्गों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे शरीर की कमजोरी और बढ़ती बीमारियाँ, मानसिक तनाव और अवसाद, अकेलापन, आर्थिक असुरक्षा, परिवार से दूर रहना और सामाजिक गतिविधियों में कमी। वे चाहते हैं कि कोई उनका साथ दे, उनकी बात सुने और वे जीवन में खुशी महसूस करें, लेकिन कई बार यह संभव नहीं हो पाता।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1990 में यह निर्णय लिया कि हर साल 1 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के रूप में मनाया जाएगा, ताकि समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़े। इस दिवस का उद्देश्य बुजुर्गों को समाज में सम्मानजनक स्थान देना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है।

2025 की थीम है “स्थानीय और वैश्विक कार्रवाई चला रहे वृद्धजन: हमारी आकांक्षाएं, हमारी भलाई,” जो वृद्धजनों को सक्रिय भागीदार मानती है और उनके अनुभवों, ज्ञान का सम्मान करने पर जोर देती है। इसका मकसद एक ऐसा समाज बनाना है जहाँ उम्र के आधार पर भेदभाव न हो और बुजुर्ग अपनी इच्छाओं के अनुसार सम्मानजनक जीवन जी सकें।

समाज की असली प्रगति तब मानी जा सकती है जब बुजुर्गों को उनकी गरिमा के साथ जीवन बिताने का अवसर मिले। हमें अपने सांस्कृतिक मूल्यों को पुनः अपनाते हुए एक ऐसा परिवेश तैयार करना होगा जहाँ हर उम्र के लोगों को बराबर सम्मान और समर्थन मिले।