विज्ञापन पर एकाधिकार पड़ा भारी, कोर्ट में हारा Google
गूगल को तगड़ा झटका: एंटीट्रस्ट केस में मिली हार, बेचना पड़ सकता है Ad Manager
विज्ञापन तकनीक के बाजार में एकाधिकार रखने के आरोपों में गूगल को अमेरिका की अदालत से करारा झटका मिला है। वॉशिंगटन की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने माना है कि गूगल ने पब्लिशर्स, विज्ञापनदाताओं और ऐड एक्सचेंज के क्षेत्रों में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए जानबूझकर एंटी-ट्रस्ट रणनीतियां अपनाईं। इस फैसले के बाद गूगल पर अब Ad Manager को कंपनी से अलग करने का दबाव बनता जा रहा है।
तीन क्षेत्रों पर गूगल का नियंत्रण बना समस्या
अदालत में पेश किए गए आरोपों में बताया गया कि गूगल ने तीन मुख्य क्षेत्रों –
-
पब्लिशर ऐड सर्वर,
-
विज्ञापनदाताओं के टूल्स,
-
और ऐड एक्सचेंज –
में जानबूझकर वर्चस्व बनाए रखा, जिससे प्रतिस्पर्धा की संभावनाएं खत्म हो गईं।
जज लियोनी ब्रिंकमा ने कहा कि अधिकतर वेबसाइटें गूगल के विज्ञापन सॉफ्टवेयर पर निर्भर हैं, जिससे उन्हें कोई अन्य विकल्प ही नहीं मिलता। इसके अलावा, गूगल पर यह भी आरोप है कि उसने अपने उत्पादों की कुछ अहम विशेषताएं हटाकर बाज़ार में अपनी पकड़ और मजबूत की।
भारी राजस्व, लेकिन कम पारदर्शिता
गूगल की पैरेंट कंपनी Alphabet की 2024 में कुल कमाई करीब 350 अरब डॉलर रही, जिसमें से 75% हिस्सा विज्ञापनों से आया। हालांकि, गूगल का Ad Network (जहां Ad Manager शामिल है) इस राजस्व में सिर्फ 8.7% और मुनाफे में 1.5% का योगदान देता है। बावजूद इसके, यह हिस्सा बाजार में गूगल की ताकत का अहम स्रोत बना हुआ है।
क्या अब गूगल को अलग करना पड़ेगा Ad Manager?
सरकारी पक्ष चाहता है कि गूगल के Ad Manager को उसके नेटवर्क ग्रुप से अलग किया जाए ताकि प्रतियोगिता को मौका मिल सके। अदालत ने माना है कि गूगल ने प्रतिस्पर्धियों को दबाने के लिए अनुचित और अवैध तरीके अपनाए। हालांकि, गूगल के पास अब भी सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देने का विकल्प है।
पुराना इतिहास, नई कार्रवाई
गूगल इससे पहले भी कई देशों में इसी तरह के एंटीट्रस्ट मामलों का सामना कर चुका है और कई बार जुर्माना भरना पड़ा है। अब देखना यह होगा कि अमेरिकी अदालत आगे क्या फैसला सुनाती है – क्या गूगल को Ad Manager से हाथ धोना पड़ेगा?

