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पुण्यतिथि विशेष:- आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर

आज, 11 जनवरीपूरा देश “जय जवानजय किसान” के प्रणेता और सादगी व ईमानदारी के प्रतीक लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे है। भारतीय इतिहास के इस महान नेता ने अपने विचारों और कार्यों से न केवल देश का नेतृत्व कियाबल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित किया। उनकी सादगी और अद्वितीय नेतृत्व क्षमता ने भारतीय राजनीति में एक मिसाल कायम कीजो आज भी हर नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

उनका का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय (अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर) में हुआ। उनके पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थेलेकिन शास्त्री जी ने कम उम्र में ही अपने पिता को खो दिया। उनकी परवरिश ननिहाल में हुई।

शास्त्री जी के स्कूल जाने का तरीका भी उनकी मेहनत और जज्बे को दिखाता है—वे नदी तैरकर स्कूल जाते थे क्योंकि नाव का किराया देना उनके परिवार के लिए मुश्किल था। पढ़ाई में उत्कृष्ट और चरित्र में दृढ़शास्त्री जी का बचपन से ही आत्मनिर्भरता पर जोर था।

1926 में उन्होंने काशी विद्यापीठ से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। यहां उन्हें “शास्त्री” की उपाधि दी गईजिसका अर्थ है “विद्वान।” यह उपाधि उनके नाम का अभिन्न हिस्सा बन गई।

शास्त्री 1920 के दशक में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े। उन्होंने असहयोग आंदोलन और 1930 में नमक सत्याग्रह में भाग लियाजिसके लिए उन्हें दो साल से अधिक जेल में रहना पड़ा। 1942 के “भारत छोड़ो आंदोलन” में भाग लेने के कारण वे 1946 तक जेल में रहे। अपने जेल प्रवास के दौरान उन्होंने किताबें पढ़कर और समाज सुधारकों के कार्यों का अध्ययन कर अपने ज्ञान को समृद्ध किया।

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

शास्त्री जी ने 1920 के दशक में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कदम रखा। महात्मा गांधी और लोकमान्य तिलक से प्रभावित होकर उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया।

•1930 में नमक सत्याग्रह: शास्त्री जी ने इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और दो साल जेल में बिताए।

•भारत छोड़ो आंदोलन: 1942 में महात्मा गांधी के इस आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें फिर से जेल भेजा गयाजहां वे 1946 तक रहे।

जेल में अपने समय का उपयोग उन्होंने अध्ययन और खुद को समाज सुधारकों और दार्शनिकों के विचारों से समृद्ध करने में किया।

· राजनीतिक जीवन: नीतियों और सुधारों के जनक

आजादी के बादशास्त्री जी ने भारतीय राजनीति में अपने कार्यों से मिसाल कायम की।

•उत्तर प्रदेश में मंत्री: 1947 में वे पुलिस और परिवहन मंत्री बने। उन्होंने महिला कंडक्टरों की नियुक्ति की और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज के बजाय पानी की बौछारों का इस्तेमाल करने का आदेश दिया।

•रेल मंत्री: 1955 में रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने यात्री सुरक्षा को प्राथमिकता दी। चेन्नई में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री की स्थापना उनके प्रयासों का हिस्सा थी।

•गृह मंत्री: 1961 में गृह मंत्री के रूप में उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण समिति का गठन किया और “शास्त्री फॉर्मूला” पेश कियाजिसने भाषा विवादों को सुलझाने में मदद की।

प्रधानमंत्री के रूप में: विकास और एकता का आह्वान

9 जून 1964 को लाल बहादुर शास्त्री भारत के प्रधानमंत्री बने।

जय जवानजय किसान: 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान यह नारा देकर उन्होंने देश को एकजुट किया।

श्वेत क्रांति: दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना की।

•हरित क्रांति: खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया।

•1965 का भारत-पाक युद्ध: जब पाकिस्तान ने हमला कियातो शास्त्री जी ने सशस्त्र बलों को जवाबी कार्रवाई की पूरी छूट दी और कहा, “बल का जवाब बल से दिया जाएगा।”

•ताशकंद समझौता: 10 जनवरी 1966 को उन्होंने ताशकंद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। लेकिन इसके कुछ घंटे बाद11 जनवरी की रातउनका निधन रहस्यमय परिस्थितियों में हो गया।

दिलचस्प तथ्य और अनमोल विचार

लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगीनिष्ठा और दृढ़ता का प्रतीक है। उनके विचार और कार्य आज भी हमें प्रेरित करते हैं। आइएउनके आदर्शों को अपनाकर एक सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण करें।

•शास्त्री जी ने अपनी शादी में दहेज के रूप में केवल एक चरखा और खादी का कपड़ा लिया।

•वे अपनी सादगी के लिए प्रसिद्ध थे—प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल करने से पहले इसका किराया पूछा।

•उनका नेतृत्व इतना प्रेरक था कि 1965 के युद्ध के दौरान देशवासियों ने स्वेच्छा से एक दिन का भोजन छोड़कर सेना का समर्थन किया।

· हमारी ताकत और मजबूती के लिए सबसे आवश्यक है कि लोगों के बीच एकता कायम की जाए।

· देश की प्रगति के लिए हमें आपस में लड़ने के बजाय गरीबीबीमारी और अज्ञानता के खिलाफ संघर्ष करना होगा।

· हम केवल अपने लिए नहींबल्कि पूरी दुनिया की शांतिविकास और कल्याण में विश्वास रखते हैं।

· कानून का सम्मान करना आवश्यक हैताकि हमारे लोकतंत्र की नींव मजबूत बनी रहे और हमारा लोकतंत्र फल-फूल सके।

· जब तक हम किसानों के अधिकारों की रक्षा नहीं करेंगेतब तक विकास संभव नहीं है।

· अहिंसा और शांति का पालन करना हमारा मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।