सुरक्षाबल के जवानों की काउंसलिंग, दूर हो रहा मानसिक तनाव, जानें मुंबई में चल रहा प्रॉजेक्ट मान क्या
मुंबई : सुरक्षाबलों में ऐसे जवानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो किसी न किसी वजह से मानसिक दबाव का शिकार हो रहे हैं। अतीत में घटित कई अप्रिय घटनाओं को देखते हुए अब देश के सुरक्षा बल अपने जवानों की सेहत को लेकर काफी सजग हो गए हैं। ऐसे में उनकी मदद करने को कई एनजीओ और कार्पोरेट कंपनियां भी आगे आ रही हैं। एक ऐसी ही पहल के तहत आदित्य बिरला एजुकेशन ट्रस्ट ने एम-पावर पहल के अंतर्गत ‘प्रॉजेक्ट मान’ प्रोग्राम शुरू किया है। आदित्य बिरला एजुकेशन ट्रस्ट ने एम-पावर पहल के अंतर्गत सीआईएसएफ के जवानों के लिए ‘प्रॉजेक्ट मान’ प्रोग्राम शुरू किया है। सैंकड़ों जवानों की काउंसिलिंग की गई। स्क्रीनिंग में सबसे कॉमन स्ट्रेस की समस्या देखने को मिली। बातचीत के दौरान स्ट्रेस के कई कारण भी सामने आए। ऐसे में काउंसलर ने बहुत अधिक स्ट्रेस से जूझ रहे जवानों की काउंसलिंग के बाद कुछ थेरेपी दी, जिसका सकारात्मक परिणाम भी आ रहे हैं। स्क्रीनिंग के साथ काउंसलिंग और ट्रेनिंग ने जवानों को स्ट्रेस पहचानने और उससे निपटने में मदद की।
मिला क्रोनिक पोस्ट ट्रॉमैक्टिक स्ट्रेस डिसऑर्डर
सीआईएसएफ में एस.आई. के पद कार्यरत राम बहादुर (बदला हुआ नाम) दूसरी जगह पर सेटल नहीं हो पा रहे थे, वे अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में भी असमर्थ थे। साथ ही वे एकाग्रता में कमी और आत्मविश्वास की कमी से भी जूझ रहे थे। स्क्रीनिंग के दौरान यह पता चला कि वे क्रोनिक पोस्ट ट्रॉमैक्टिक स्ट्रेस डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं। प्रॉजेक्ट मान के तहत उनकी काउंसलिंग और थेरेपी शुरू हुई। अब वे अपनी भावनाओं को कंट्रोल करने में सक्षम हैं, एकाग्रता बढ़ने से काम में त्रुटियां कम हो रही हैं। हाल ही में उन्हें पदोन्नति मिली है। अभी भी लंबे समय से चले आ रहे आघात अनुभव के लिए थेरेपी जारी है।
मोबाइल की लत से डिप्रेशन तक
इसी तरह, मोबाइल की लत और डिप्रेशन से पीड़ित 31 वर्षीय एस.आई. वीर सिंह (बदला हुआ नाम) डिप्रेस मूड, एकाग्रता में कमी, गिल्ट महसूस करना, परिवार के साथ विवाद और गुस्से से परेशान थे। उनकी काउंसलिंग और थेरेपी शुरू हुई। अब सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। उनके माता-पिता के साथ रिश्ते में सुधार आया, क्रोध कम होने के साथ ही कॉन्फिडेंट भी लौट आया है।

