गुजराती बनाम मराठी की लड़ाई, BJP को प्रत्याशी बदलना पड़ेगा मंहगा? जानें मुंबई उत्तर-पूर्व लोकसभा सीट का समीकरण
मुंबई उत्तर-पूर्व लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार मिहिर कोटेचा ने शिवसेना (ठाकरे गुट) प्रत्याशी संजय दीना पाटील पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मेरे प्रतिद्वंद्वी विकास के मुद्दे पर बात नहीं करना चाहते हैं, इसलिए वह गुजराती-मराठी को मुद्दा बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई को झोपड़पट्टी मुक्त बनाना मेरा लक्ष्य है।
मुंबई: महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के पांचवें व अंतिम चरण के लिए लड़ाई तेज हो गई है। चुनाव प्रचार अपने चरम पर पहुंच गया है। प्रवासी वोटरों को पटाने के लिए उद्धव सेना और कांग्रेस ने जहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, वहीं उद्धव के वोटरों को अपने खेमे में मिलाने के लिए बीजेपी और शिंदे सेना किसी प्रकार की कमी नहीं रख रहे हैं। उत्तर पूर्व मुंबई लोकसभा सीट पर लड़ाई अपने दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। एक-दूसरे के मतदाताओं को अपनी तरफ खींचने के लिए बीजेपी के उम्मीदवार मिहिर कोटेचा और उद्धव सेना के संजय दीना पाटील ने हिंदू-मुस्लिम से लेकर गुजराती बनाम मराठी कार्ड खेला है, लेकिन वोटर जागरूक दिखाई दे रहा है। इनका खेल कितना सफल रहा यह तो 4 जून को ईवीएम बोलेगी। उत्तर पूर्व मुंबई लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी को उम्मीदवार बदलना अब भारी पड़ रहा है। अब इसका अहसास बीजेपी नेताओं को होने लगा है। उत्तर पूर्व सीट पर भांडुप, कांजुरमार्ग, विक्रोली और घाटकोपर पश्चिम क्षेत्र को शिवसेना के कट्टर समर्थकों का एरिया माना जाता है। इन क्षेत्रों में शिवसैनिकों का जबरदस्त समर्थन संजय पाटील को मिलता दिखाई दे रहा है।
बीजेपी के मिहिर कोटेचा ने भी शिवसेना के प्रभाव वाले इन इलाकों में कई पद यात्राएं और बैठकें कर चुके हैं, परंतु अब तक बालासाहेब ठाकरे के मतदाताओं को बीजेपी की ओर खींचने में सफल नहीं रहे हैं। इन क्षेत्रों में बीजेपी की पकड़ नहीं है। हालांकि पूर्व सांसद मनोज कोटक की अपनी व्यक्तिगत पकड़ जरूर है। बालासाहेब के समर्थक टस से मस नहीं होने पाएं, इस पर संजय पाटील लगे हैं।
मुस्लिम उम्मीदवार का बीजेपी को फायदा नहीं
मुलुंड, घाटकोपर पूर्व का क्षेत्र बीजेपी के समर्थकों का माना जाता है, लेकिन रमाबाई कॉलोनी, कामराज नगर संजय पाटील के साथ दिखाई दे रहा है। मानखुर्द शिवाजी नगर विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम बहुल है, जहां संजय पाटील मजबूत दिखाई दे रहे हैं। यहां के वोटरों को पटाने के लिए मिहिर की रणनीति सफल होती नहीं दिख रही है। हालांकि, मुस्लिम उम्मीदवार भी मैदान में हैं पर वे इतने प्रभावी नहीं हैं कि बीजेपी को इसका फायदा मिले। कोटेचा और पाटील के समर्थक यहां के चुनाव को हिंदू बनाम मुस्लिम और गुजराती, राजस्थानी, उत्तर भारतीय बनाम मराठी बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, पर अब तक इसमें कोई सफल होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। दोनों ही उम्मीदवार के लोग कहते हैं कि छह विधानसभा क्षेत्र में मुलुंड और घाटकोपर पूर्व कोटेचा को बड़ी बढ़त मिल सकती है, तो संजय पाटील को भांडुप, विक्रोली और मानखुद शिवाजी नगर विधानसभा बढ़त दिला सकता है। घाटकोपर पश्चिम विधानसभा में किसी को ज्यादा बढ़त नहीं दिखाई दे रही है। बीजेपी के लोग दबे स्वर में कहने लगे हैं कि मोदी पर ही सब कुछ टिका है।
उत्तर मुंबई में भी कोशिश
उत्तर मुंबई लोकसभा सीट पर बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को सबसे सुरक्षित सीट समझकर उतारा है, तो कांग्रेस ने भूषण पाटील को अवसर दिया है। यहां भी हिंदू बनाम मुस्लिम और गुजराती, राजस्थानी, उत्तर भारतीय बनाम मराठी बनाने की पुरजोर कोशिश जारी है, पर दोनों ही सफल नहीं होते नहीं दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस के उम्मीदवार भूषण पाटील कहते हैं कि उनकी पत्नी जैन समाज से हैं, इसलिए ऐसा कुछ नहीं होने वाला है।
अपनों को मनाने की कोशिश:- दक्षिण मुंबई से शिंदे सेना ने यामिनी जाधव को उम्मीदवारी देकर मराठी वोटों में सेंध लगाने की कोशिश की है, लेकिन दक्षिण मुंबई में मराटी वोटरों के साथ-साथ मुस्लिम वोट भी डिसाइडिंग फैक्टर हैं। इस बार मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में उद्धव ठाकरे के साथ दिखाई दे रहा हैं। हालांकि यामिनी जाधव और उनके पति यशवंत जाधव मुस्लिम वोटों को अपनी तरफ खींचने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। पार्टी पहले मान रही थी कि मलबार हिल, कुलाबा, वरली और भायखला विधानसभा में यामिनी को बढ़त मिलेगी। चूंकि शिवडी विधानसभा में यशवंत जाधव का अपना खुद का जनसंपर्क का जाल है, इसलिए वहां से भी फायदा होगा। लेकिन उद्धव सेना के अरविंद सावंत के खिलाफ कोई ऐंटि-इनकमबेंसी दिखाई नहीं दे रही है, ऐसे में इस सीट पर मुकाबला रोचक होगा।

