पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा संबंधी चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में एकता का आह्वान किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पेट्रोल और डीजल को लेकर दुनिया भर में एक संकट उभर रहा है।
आकाशवाणी पर अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में राष्ट्र को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि ये चुनौतीपूर्ण समय हैं क्योंकि यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं का एक प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि भारत के वैश्विक संबंध, विभिन्न देशों से प्राप्त समर्थन और पिछले एक दशक में नई दिल्ली द्वारा निर्मित मजबूतियाँ भारत को इन परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम बनाती हैं।
उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि देश इस कठिन परिस्थिति से उसी तरह विजयी होकर उभरेगा जैसे कोविड महामारी के दौरान उभरा था। प्रधानमंत्री ने बताया कि लाखों भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं और उन्होंने एक करोड़ से अधिक भारतीयों को हर तरह की सहायता प्रदान करने के लिए इन देशों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी नागरिकों से एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करने का आग्रह किया।
इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने वालों की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह 140 करोड़ देशवासियों के हितों का मामला है और इसमें स्वार्थपूर्ण राजनीति की कोई जगह नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि अफवाहें फैलाने वाले देश को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। श्री मोदी ने सभी नागरिकों से सतर्क रहने और अफवाहों से गुमराह न होने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल सरकार द्वारा दी जा रही निरंतर जानकारी पर ही भरोसा किया जाना चाहिए।
आज के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने ज्ञान भारतम सर्वेक्षण पर प्रकाश डाला, जो भारत की महान संस्कृति और विरासत को प्रदर्शित करने के लिए जनभागीदारी की भावना को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि इस पहल का उद्देश्य देशभर की पांडुलिपियों के बारे में जानकारी एकत्र करना है। लोग ज्ञान भारतम ऐप के माध्यम से इस सर्वेक्षण में भाग ले सकते हैं।
श्री मोदी ने कहा कि यदि उनके पास कोई पांडुलिपि या उससे संबंधित जानकारी है, तो वे उसकी छवि ज्ञान भारतम ऐप पर साझा कर सकते हैं। प्रत्येक प्रविष्टि से संबंधित जानकारी को दर्ज करने से पहले सत्यापित किया जा रहा है। अब तक हजारों पांडुलिपियां साझा की जा चुकी हैं।
प्रधानमंत्री ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के नामसाई के चाओ नांटिसिंध लोकांग ने ताई लिपि में पांडुलिपियाँ भेजी हैं। अमृतसर के अमित सिंह राणा ने गुरुमुखी लिपि में पांडुलिपियाँ भेजी हैं। कुछ संगठनों ने ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपियाँ उपलब्ध कराई हैं।
श्री मोदी ने बताया कि राजस्थान के अभय जैन पुस्तकालय ने तांबे की प्लेटों पर खुदे हुए बहुत पुराने पांडुलिपियों को साझा किया है। लद्दाख के हेमिस मठ ने बहुमूल्य तिब्बती पांडुलिपियों के बारे में जानकारी दी है। यह सर्वेक्षण जून के मध्य तक जारी रहेगा। श्री मोदी ने सभी से इस सर्वेक्षण के माध्यम से अपनी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को साझा करने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ‘एमवाई भारत’ राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी निभाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने देश के युवाओं को विभिन्न सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए संगठन की सराहना की। उन्होंने हाल ही में ‘एमवाई भारत’ द्वारा आयोजित बजट क्विज़ के बारे में भी बताया। इसका उद्देश्य देश भर के युवाओं को बजट प्रक्रिया और नीति निर्माण से जोड़ना था। देश भर से लगभग 12 लाख युवाओं ने इस क्विज़ में भाग लिया। क्विज़ के बाद, निबंध प्रतियोगिता के लिए लगभग एक लाख साठ हजार प्रतिभागियों का चयन किया गया।
श्री मोदी ने कहा कि उन्हें इनमें से कुछ निबंध पढ़ने का अवसर मिला, जिनसे देश के विकास में युवाओं के योगदान की उत्सुकता स्पष्ट होती है। उन्होंने तेलंगाना के सूर्यापेट से कोटला रघुवीर रेड्डी, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से सौरभ बैसवार और बिहार के गोपालगंज से सुमित कुमार का नाम लिया, जिन्होंने किसान कल्याण से संबंधित विषय पर लिखा है।
पंजाब के मोहाली से आंचल और ओडिशा के केंद्रपाड़ा से ओम प्रकाश रथ ने महिला नेतृत्व वाले विकास को आगे बढ़ाने के तरीकों पर अपने विचार व्यक्त किए। हरियाणा के यमुनानगर से प्रथम बरार ने लिखा है कि एक हरित और स्वच्छ भारत ही समृद्ध भारत का एकमात्र मार्ग है। दिल्ली से शंख गुप्ता ने सुझाव दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की पहचान करने के लिए और अधिक प्रयास किए जाने चाहिए। श्री मोदी ने अपने विचार साझा करने वाले सभी युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि ये विचार देश को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में आयोजित टी20 विश्व कप में भारतीय टीम की ऐतिहासिक जीत पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कर्नाटक के हुबली में जम्मू और कश्मीर क्रिकेट टीम द्वारा रणजी ट्रॉफी जीतने पर भी खुशी जताई। उन्होंने कहा कि लगभग सात दशकों के लंबे इंतजार के बाद टीम का पहला रणजी ट्रॉफी खिताब जीतना बेहद उत्साहजनक है। मोदी ने कहा कि यह अभूतपूर्व सफलता खिलाड़ियों के वर्षों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने टीम के कप्तान पारस डोगरा के असाधारण कौशल की प्रशंसा की। उन्होंने युवा कश्मीरी गेंदबाज आकिब नबी के प्रदर्शन की भी सराहना की, जिन्होंने रणजी ट्रॉफी में 60 विकेट लिए।
श्री मोदी ने कहा कि जम्मू और कश्मीर के लोगों में खेलों के प्रति अपार जुनून है और अब यह प्रमुख खेल आयोजनों का केंद्र बनता जा रहा है। गुलमर्ग ने खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों की मेजबानी करके अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वहां के युवाओं में फुटबॉल जैसे खेल भी काफी लोकप्रिय हैं। प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि जम्मू और कश्मीर के खिलाड़ियों की यह जीत का सिलसिला भविष्य में भी जारी रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश के गुलवीर सिंह का भी जिक्र किया, जिन्होंने न्यूयॉर्क सिटी हाफ मैराथन में तीसरा स्थान हासिल करके इतिहास रच दिया। गुलवीर सिंह एक घंटे से कम समय में हाफ मैराथन पूरी करने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। मोदी ने स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह की भी प्रशंसा की, जिन्होंने स्क्वैश ऑन फायर ओपन में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता। उन्होंने महज 17 साल की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही, वह पीएसए विश्व रैंकिंग में शीर्ष 20 में जगह बनाने वाली सबसे कम उम्र की एशियाई महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
प्रधानमंत्री ने अस्मिता एथलेटिक्स लीग का जिक्र किया, जिसमें 8 मार्च को महिला दिवस के अवसर पर कई खेल आयोजनों का आयोजन किया गया था। इस लीग में लगभग 2 लाख महिलाओं ने भाग लिया।
स्वास्थ्य के विषय पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने श्रोताओं से अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में 100 दिन से भी कम समय बचा है। उन्होंने कहा कि विश्व भर में योग के प्रति आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने अफ्रीका के जिबूती के अल्मिस का उदाहरण दिया, जो अपने अरविंद योग केंद्र के माध्यम से योग को बढ़ावा दे रहे हैं। वे कई अन्य स्थानों पर भी लोगों को योग सिखाते हैं।
आज के ‘मन की बात’ के एपिसोड में प्रधानमंत्री ने लोगों से चीनी का सेवन कम करने का आग्रह किया, जिसमें उन्होंने इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर युवराज दुआ की पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया का जिक्र किया। कंटेंट क्रिएटर ने श्री मोदी से अपने पिता को चीनी का सेवन कम करने के लिए कहने का अनुरोध किया था।
प्रधानमंत्री ने यह देखकर प्रसन्नता व्यक्त की कि उनके अनुरोध का उनके पिता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। श्री मोदी ने खाना पकाने के तेल की खपत में 10 प्रतिशत की कटौती करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इन छोटे प्रयासों से मोटापा और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को दूर रखा जा सकेगा।
श्री मोदी ने बेंगलुरु में शिक्षा से संबंधित एक अनूठी पहल के बारे में बात की। बेंगलुरु में एक टीम प्रयोग शिक्षा अनुसंधान संस्थान चला रही है। प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताया कि उन्होंने अन्वेषण नामक एक प्रयोग शुरू किया है, जो कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को रसायन विज्ञान, भूविज्ञान और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में नवाचार करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों को अच्छा शोध अनुभव और अपनी परियोजनाओं को प्रकाशित करने का मंच मिलता है।
प्रधानमंत्री ने शिक्षा के माध्यम से अतीत को संरक्षित करने और भविष्य की तैयारी करने के प्रयासों के लिए नागा समुदाय की सराहना की। उन्होंने कहा कि नागा समुदाय अपनी जनजातीय परंपराओं का गहरा सम्मान करता है। उन्होंने बताया कि नागा जनजातियों में मोरंग शिक्षा की एक पारंपरिक प्रणाली है, जिसमें बुजुर्ग अपने अनुभवों के माध्यम से युवाओं को पारंपरिक ज्ञान, इतिहास और जीवन कौशल सिखाते हैं। समय के साथ, यह प्रणाली मोरंग शिक्षा की अवधारणा में विकसित हुई है। इस प्रणाली के माध्यम से, समुदाय के बुजुर्ग कहानियों, लोकगीतों और पारंपरिक खेलों के द्वारा युवाओं को जीवन कौशल सिखाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के कई हिस्सों में ग्रीष्म ऋतु के आगमन के साथ ही जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों में व्यापक जागरूकता पैदा की है। इस अभियान के तहत देश भर में लगभग 50 लाख कृत्रिम जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि जल संकट से निपटने के लिए अब हर गांव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि अमृत सरोवर अभियान के तहत भी देश भर में लगभग 70 हजार अमृत सरोवर बनाए गए हैं। बरसात के मौसम के आगमन से पहले ही इन सरोवरों की सफाई का काम भी शुरू हो गया है।
श्री मोदी ने जनभागीदारी के माध्यम से किए गए जल संरक्षण के कुछ प्रेरणादायक उदाहरण साझा किए। उन्होंने त्रिपुरा के जम्पुई पहाड़ियों में 3,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित वांगमुन गांव का उदाहरण दिया। यह गांव गंभीर जल संकट का सामना कर रहा था।
आज वांगमुन गांव के लगभग हर घर में छत पर वर्षा जल संचयन प्रणाली लगी हुई है। श्री मोदी ने कहा कि कभी जल संकट से जूझ रहा यह गांव जल संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
श्री मोदी ने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में एक अनूठी पहल के बारे में भी बताया। इस जिले के किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखने वाले गड्ढे बनाए हैं, जिससे बारिश का पानी खेतों में ही जमा रहता है और धीरे-धीरे जमीन में रिस जाता है। आज इस क्षेत्र के 1,200 से अधिक किसानों ने इस मॉडल को अपनाया है और गांव के भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। तेलंगाना के मंचरियाल जिले के मुधिगुंटा गांव में लोग जल समस्या के समाधान के लिए एकजुट हुए हैं। चार सौ परिवारों ने अपने घरों में सोखने वाले गड्ढे बनाए हैं और जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन चलाया है। श्री मोदी ने कहा कि इससे गांव के भूजल स्तर में सुधार हुआ है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों में काफी कमी आई है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि उनकी सरकार मछुआरों का जीवन आसान बनाने के लिए पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि मछुआरे न केवल समुद्र के योद्धा हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव भी हैं। उन्होंने कहा कि बंदरगाह विकास और मछुआरों के लिए बीमा जैसी योजनाएं बेहद मददगार साबित हो रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के माध्यम से मछुआरों को मौसम की जानकारी भी दी जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि मत्स्य पालन और समुद्री शैवाल के क्षेत्र में नए नवाचार हो रहे हैं और मछुआरे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने ओडिशा के संबलपुर की सुजाता भुयान का उदाहरण दिया, जिन्होंने हीराकुड जलाशय में मछली पालन शुरू किया था। महज दो-तीन वर्षों में ही उन्होंने अपने इस प्रयास को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया।
श्री मोदी ने लक्षद्वीप के मिनिकॉय की हव्वा गुलजार का भी जिक्र किया, जो मछली प्रसंस्करण इकाई चलाती थीं। उन्होंने एक कोल्ड स्टोरेज यूनिट स्थापित करने का फैसला किया और अब उनका कारोबार बेहतर चल रहा है। इसी तरह, श्री मोदी ने बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार के बारे में भी बताया, जिन्होंने एक तालाब फार्म बनाया और इस व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक घंटे में 251 हजार से अधिक पौधे लगाए गए, जिससे एक नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। उन्होंने कहा कि इस प्रयास का सबसे उल्लेखनीय पहलू हजारों लोगों की भागीदारी थी। उन्होंने कहा कि यह जनभागीदारी “एक पेड़ मां के नाम” अभियान में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
इस अभियान के तहत देशभर में लाखों पेड़ लगाए गए हैं। श्री मोदी ने इसे प्रेरणादायक बताया कि नागालैंड के चिज़ामी गांव की महिलाएं सामूहिक रूप से 150 से अधिक किस्मों के पारंपरिक बीजों का संरक्षण कर रही हैं। इन बीजों को गांव की महिलाओं द्वारा संचालित एक सामुदायिक बीज बैंक में संरक्षित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का प्रभाव देश के हर कोने में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस योजना ने गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले की पायल मुंजपारा के जीवन में गहरा बदलाव लाया है। सूर्य पहल के माध्यम से उन्होंने सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण प्राप्त किया और चार महीने का सोलर पीवी तकनीशियन पाठ्यक्रम पूरा किया। अब वह एक कुशल सौर तकनीशियन बन चुकी हैं।
श्री मोदी ने कहा कि पायल सौर ऊर्जा उद्यम में अपनी पहचान बना रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मेरठ के अरुण कुमार अब अपने क्षेत्र में ऊर्जा प्रदाता बन गए हैं।
हाल ही में, अरुण कुमार ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। जयपुर के मुरलीधर ने भी इसी तरह की सफलता हासिल की है। पहले उनकी खेती डीजल पंप पर निर्भर थी, जिस पर हर साल हजारों रुपये खर्च होते थे। सौर पंप अपनाने के बाद उनकी खेती का तरीका पूरी तरह बदल गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों को भी लाभ मिल रहा है। त्रिपुरा में रियांग जनजाति के कई गांव बिजली की समस्या से जूझ रहे थे। अब सौर मिनी-ग्रिड के जरिए उनके घरों में रोशनी बनी रहती है। मोदी ने कहा कि देश में सौर ऊर्जा क्रांति के ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं। उन्होंने लोगों से इस क्रांति में शामिल होने और दूसरों को भी इससे जोड़ने का आग्रह किया।
अंत में, प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने आसपास की प्रेरणादायक कहानियाँ साझा करते रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ये संदेश दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के मन की बात सुनने के उत्साह को भी दर्शाते हैं।

