हिन्दू तन, मन, जीवन से चर्च तक लव जिहाद : मुद्दा गंभीर है !
फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ एक बार फिर चर्चाओं में है। किंतु इस बार इसके चर्चा में आने का कारण बना है चर्च । यह फिल्म इडुक्की डायोसीज़ चर्च में कक्षा 10, 11 और 12 की छात्राओं के लिए प्रदर्शित की गई थी। चर्च ने ‘लव जिहाद’ के खतरों पर प्रकाश डालते हुए “प्यार” पर एक पुस्तिका भी जारी की। केरल में कई ईसाई धर्मगुरु राज्य में ईसाई लड़कियों के इस्लाम में धर्मान्तरण का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं और सरकार से मांग कर रहे हैं कि इस पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाए। वास्तव में फिल्म को चर्च में ईसाई लड़कियों को दिखाया जाना कोई सामान्य बात नहीं है। कहना होगा कि कहीं कुछ हो रहा है, जो बहुत ही अनुचित है। चिंता में डालता है। भविष्य को लेकर भयक्रांत करता है। अपने समाज अस्तित्व को बनाए रखने के लिए संघर्ष और जागरुकता के लिए प्रेरित करता है।
दरअसल, ‘लव जिहाद’ यह शब्द जब पहली बार प्रचलन में आया तो सेक्युलर जमात ने इसका मजाक बनाने में जरा भी देरी नहीं की थी । इसे मिथ्या और एक वर्ग विशेष के प्रति दुर्भावना रखने के कारण से पैदा हुए शब्द के रूप में प्रचारित किया । कहा गया, मुसलमान और इस्लाम को बदनाम करने के लिए भारत में कट्टर हिन्दुओं ने यह शब्द गढ़ा है, ‘लव जिहाद’ जैसा कहीं कुछ भी नहीं होता। कोई मुसलमान ‘लव जिहाद’ नहीं करता। किंतु इस ‘लव जिहाद’ की सच्चाई यह है कि इस शब्द की उत्पत्ति किसी हिन्दू मन की उपज नहीं है।
वर्ष 2003 और 2004 में इग्लैंड समेत तमाम यूरोपीय देशों में इस बात को लेकर विवाद की शुरुआत हुई कि मुस्लिम युवा वहां की ईसाई लड़कियों को बहला-फुसलाकर न केवल काबू में कर रहे हैं, बल्कि उनको इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उसी समय सबसे पहले इस्लाम के इस क्रूर चेहरे को लव जिहाद का नाम दिया गया। वहीं, भारत में 14 साल पहले ‘लव जिहाद’ शब्द का पहली बार इस्तेमाल हुआ, जब केरल कैथलिक बिशप काउंसिल ने दावा किया था कि लगभग 4,500 लड़कियों को लव जिहाद का निशाना बनाया गया है। इसी दौरान हिंदू जनजागृति संगठन का भी आरोप सामने आया था कि केरल में 30,000 लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन किया गया है। ध्यान रहे, यह आंकड़ा केरल राज्य का है, वह भी चौदह वर्ष पहले का।
वस्तुत: पहली बार 2009 में यह शब्द प्रचलन में तब आया जब इसको लेकर केरल के तत्कालीन मार्क्सवादी मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन ने कहा कि समूचे केरल के इस्लामीकरण की साजिश चल रही है। यहां सुनियोजित तरीके से हिन्दू और ईसाई लड़कियों के साथ मुस्लिम लड़कों के निकाह कराने का षड्यंत्र चलाया जा रहा है। तत्पश्चात् जस्टिस केटी शंकरन ने भी माना था कि केरल के कुछ हिस्सों में जबरन धर्म परिवर्तन के मामले मिले हैं। केरल उच्च न्यायालय ने ‘प्यार’ की आड़ में ‘जबरन’ धर्म परिवर्तन के संकेत पाए जाने पर सरकार से ऐसे ‘भ्रामक’ कृत्यों पर रोक लगाने के लिए कानून बनाने पर विचार करने को कहा । न्यायालय का कहना था कि ”प्यार के बहाने कोई बाध्यकारी, भ्रामक धर्म परिवर्तन नहीं हो सकता।”
इस वक्त पुलिस रिपोर्ट में यह सामने आया कि “कुछ संगठन” अन्य धर्म की लड़कियों को इस्लाम में परिवर्तित करने का ‘ठोस’ प्रयास करते पाए गए। । पुलिस की विशेष शाखा की रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम संगठन अपनी ‘लव जिहाद’ की योजना को पूर्ण करने के लिए अच्छे परिवारों की प्रतिभाशाली उच्च जाति की हिंदू और ईसाई लड़कियों को ‘फंसाने’ का काम करते हैं । साक्ष्य के आधार पर अदालत ने पाया कि यह षड्यंत्र 1996 में कुछ मुस्लिम संगठनों के द्वारा शुरू किया गया था। न्यायालय ने जिन संगठनों की ओर इशारा किया था, उनके बारे में जानने पर सामने आया कि पापुलर फ्रंट आफ इंडिया और नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट जैसे इस्लामिक संगठन इस कार्य में लगे थे। इनकी गतिविधियों और राज्य में जबरन मतांतरण को लेकर यहां के ईसाई संगठनों और विश्व हिंदू परिषद ने गंभीर चिंता जताई थी। लेकिन तत्कालीन वामपंथी सरकार ने इसे जरा भी गंभीरता से नहीं लिया था।
वस्तुत: समय बीतने के साथ कई वर्ष आज बीत चुके हैं, न्यायालय ने जो कहा, वह अपनी जगह है, लेकिन ‘लव जिहाद’ का सच आज भी वही है, जोकि 14 साल पहले केरल में था। आज केरल ही क्यों भारत के हर राज्य में ‘लव जिहाद’ से जुड़े अनेकों प्रकरण सामने आ रहे हैं। जब पर्दे पर “द केरल स्टोरी” फिल्म आई तब देश के कई राज्यों में पीड़िताएं अपने साथ हुए अत्याचार की कहानी बताने सामने आईं । कुछ ने हिम्मत दिखाकर पुलिस प्रकरण भी दर्ज कराए, जिसके बाद देश भर में बड़ी संख्या में लोगों ने यह स्वीकार्य किया कि हां, यह ‘लव जिहाद’ ही है जो गैर मुस्लिम लड़कियों को अपना शिकार बना रहा है।
इस फिल्म के आने के साथ ही यह चर्चा भी शुरू हो गई कि इस्लामी धर्मांतरण और आतंकवाद के तमाम चेहरे पूरी दुनिया के सामने हैं। उनमें जो सबसे लेटेस्ट है वह है ‘लव जिहाद’। इन सभी का एक ही उद्देश्य कि है पूरी दुनिया को ‘दारुल इस्लाम’ बना दिया जाए । (इस्लाम में मुस्लिम शासन वाले देश को ‘दारुल इस्लाम’ और गैर मुस्लिम शासन वाले देश को ‘दारुल हर्ब’ कहा गया है। कट्टरपंथी मुस्लिम मानते हैं कि भारत में शासन करने के लिए पर्याप्त मुस्लिम हैं, इसलिए इस देश को ‘दारुल इस्लाम’ होना चाहिए) ।
यही कारण है कि कहीं 2050 तक भारत को ‘दारुल इस्लाम’ बना देने की योजना बनती है तो कहीं आज ही इसे ‘दारुल इस्लाम’ बना दिया जाए इसके लिए षड्यंत्र रचे जाते हैं। इसलिए अपनी जनसंख्या बढ़ाने के लिए हर हथकंडे के तहत कहीं बम,बंदूक, तलवार के सहारे धर्मांतरण किया जा रहा है तो कहीं अन्य धर्मों की मान्यताओं के प्रति नफरत भर, उनका मजाक बनाकर भ्रम पैदा करते हुए कन्वर्जन किया जा रहा है । इसमें कहीं, धर्मांतरण करने के लिए ये इस्लामिक लोग ‘लव जिहाद’ का सहारा ले रहे हैं । वस्तुत: आज इससे जुड़ी कहानियां अनेकों हैं। ‘लव जिहाद’ के कुचक्र को और अधिक अच्छे से समझने के लिए कुछ का यहां जिक्र भी किया जा सकता है।
दिल्ली के मंगोलपुरी क्षेत्र में रहनेवाली एक युवती ने ‘लव जिहाद’ से बचने के लिए अपनी जान दे दी। आत्महत्या से पहले लिखे चिट्ठी में जो कुछ उसने लिखा है, उससे साफ हो जाता है कि, युवती एक मुसलमान प्रेमी से बहुत तंग आ गई थी। इस युवक ने शुरू में अपना धर्म छिपाकर तथा अपना नाम विशाल बताकर युवती को प्रेम जाल में फंसाया था किंतु जब युवती को वास्तविकता का पता चला तो उसने नाता तोड दिया । किंतु इसके पश्चात धर्मांध युवक मोहम्मद एजाज, उसके दोस्त तथा संबंधी लोग युवती पर विवाह करने के लिए दबाव डालने लगे, इस कारण वह इतनी तंग हुई कि, उसने आत्महत्या करने का निर्णय लिया और घर में फांसी लगार्इ । जांच के समय पुलिस को युवती के पास एक चिट्ठी मिली। जिसमें युवती ने अपनी मृत्यू का कारण लिखा था। इसमें यह भी पता चला कि युवक मोहम्मद एजाज के जीजा और भाई भी युवती को संबंध बनाने के लिए दबाव बना रहे थे और ऐसा नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दे रहे थे । चिट्ठी में साफ लिखा है कि, ‘वह मुझे जीने नहीं देंगे, इसलिए मैं आत्महत्या कर रही हूं।’
गाजियाबाद में सामने आया कि पीड़ित महिला को शादी के आठ साल बाद पता चला कि उसका पति हिंदू नहीं है। राज खुल जाने के बाद आरोपी पति उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा। महिला के दो बच्चे हैं, इसके बावजूद उसने धर्म परिवर्तन से साफ इंकार कर दिया। ससुराल वालों ने ज्यादा दबाव बनाया तो वो घर छोड़कर दूसरी जगह रहने लगी, लेकिन पति अपनी मां और भाई के साथ वहां भी आ पहुंचा, उसके साथ मारपीट की गई, इसके बाद महिला ने लोकल थाने में शिकायत दर्ज कराई और इस तरह से यह पूरा षड्यंत्र सामने आ सका ।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में अपनी पहचान छुपाकर आमिर खान 4 महीने तक शादी का झांसा देकर हिंदू लड़की का शोषण करता रहा, जब लड़की ने शादी का दबाव बनाया तब पता चला कि वह अमर कुमार नहीं उसका असली नाम आमिर खान है। पीड़िता बताती है कि आमिर ने उसे कहा कि धर्म परिवर्तन कर लो इसके बाद मैं शादी कर लूंगा। लड़की धर्म परिवर्तन करने के लिए तैयार नहीं हुई बल्कि उसने थाने पहुंचकर इस लड़के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
यूपी के सोनभद्र में शाहजेब ने फेसबुक पर हिंदू नाम रोहन राय बनकर अपनी आईडी बनाई, फिर फेसबुक पर ही एक लड़की को प्रेमजाल में फंसाया। इसके बाद युवक ने लड़की से मंदिर में शादी की । पीड़िता ने बताया कि आरोपी उसका भरोसा जीतने के लिए उसके साथ कई मंदिरों में भी गया और पूजा पाठ भी करता था, इसी प्रकार सात-आठ महीने बीते और वह प्रेग्नेंट हो गई। इसी दौरान उसे पता चला कि उसका असली नाम शाहजेब पुत्र रिजवान है।
”तुम हिन्दू हो, तुम्हें अपने घर नहीं ले जा सकता, मेरे परिवार के लोग इस बात को नहीं मानेंगे, एक काम करो या तो धर्म परिवर्तन कर लो या फिर दूसरी जगह अपनी शादी कर लो”…शादी करके 9 साल साथ रहने के बाद रोहित ने नेहा से जब ये बात कही तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि रोहित ऐसा क्यों कह रहा है, लेकिन जब रोहित ने अपना असली नाम बताया तो सन्न रह गई. दरअसल मंदिर में जाकर उसकी मांग भरने वाले उस लड़के का असली नाम मोहम्मद शाहिद था। शाहिद उससे शादी करके लंबे समय से उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। वह कभी उसे अपने घर नहीं ले गया था, जब पीड़िता ने उससे ससुराल जाने की जिद्द की तब उसने अपनी सच्चाई बताई। इस मामले में केस दर्ज हो चुका है। इसी प्रकार के हजारों प्रकरण भारत के हर कोने में मौजूद हैं ।
देशभर में चर्चा में रांची का तारा सहदेव लव-जिहाद मामला अभी भी लोगों को याद है, जिसमें कि रकीबुल हसन द्वारा तारा पर इस्लाम धर्म अपनाने का इस हद तक दबाव बनाया गया था कि उसके चुंगल से बाहर आना असंभव जैसा हो गया था । यदि वह नेशनल शूटर नहीं होती तो हो सकता है कि मामला कभी इतने बड़े स्तर पर प्रकाश में ही न आ पाता । तारा शाहदेव के पति रंजीत सिंह कोहली (रकीबुल हसन) पर पत्नी को प्रताड़ित करने के मामले में जांच कर रही सीबीआई ने जो चार्जशीट दाखिल की है। उसमें कई बातें सामने आई है। सीबीआई के अनुसार, रकीबुल और उसकी मां तारा शाहदेव से जबरन इस्लाम धर्म कबूल करवाने पर अड़े थे। तारा की सास ने उससे साफ कह दिया था कि, अगर इस्लाम कबूल नहीं किया तो तुम्हारा बिस्तर वही रहेगा लेकिन मर्द बदलते रहेंगे। तारा के सिंदूर लगाने पर भी पाबंदी थी। रकीबुल और उसकी मां सिंदूर लगाने पर हाथ-पैर तोड़ने की धमकी देते थे। तारा ने बताया, रंजीत उर्फ रकीबुल हसन उसे विवाह के लिए प्रभावित करने के कई हथकंडे अपनाता था। वह अफसरों के साथ महंगी गाड़ियों में शूटिंग रेंज पर आता और खुद को बेहतर इंसान दिखाने की हर संभव कोशिश करता था। आज तारा जैसी कई ताराएं देशभर में मौजूद हैं जो नितरोज लवजिहाद के चंगुल में फंस रही हैं।
कहना होगा कि इस्लाम से जुड़े कुछ शरारती तत्वों के दिमाग से उपजे इस विचार का आतंक कितना भयंकर है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि सिर्फ हिन्दू तन, मन, जीवन ही नहीं ईसाईयत भी इससे आज अपने पर भारी संकट अनुभव कर रही है। चर्च चिंतित है कि कहीं यह इस्लामिक ‘लव जिहाद’ उनके अस्तित्व को ही न निगल ले। वहीं, हर हिन्दू घर में इस षड्यंत्र से घर के सभी सदस्यों को सावधान रहने की जरूरत पर बल दिया जा रहा है। यह बेहद गम्भीर विषय है। हिन्दू, ईसाई क्या, कई संस्कृतियों के अस्तित्व के लिए ‘लव जिहाद’ बहुत बड़ा संकट है। आज लगातार देश भर से सामने आ रहे इस तरह के मामले यह सिद्ध कर रहे हैं कि इस्लाम को माननेवाले मुसलमानों में शरारती तत्वों ने ‘लव जिहाद’ को ‘दारुल इस्लाम’ के लिए अपना हथियार बना लिया है। जबकि भारतीय संविधान इस तरह के किसी भी जिहाद को करने की अनुमति नहीं देता। भारत सभी मत, पंथ, संप्रदाय, धर्म, मजहब, रिलिजन के सह अस्तित्व को बराबर से स्वीकार्य करता है, ऐसे में इस्लाम की यह अतिवादिता एक अपराध है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए । सच्चे प्रेम के लिए नाम बदलने या किसी षड्यंत्र को करने की जरूरत नहीं पड़ती।
लेखक – रमेश शर्मा

