प्रेरक प्रसंग अध्याय 24:- मेहनत की कमाई
महात्मा टाल्स्टाय एक बार बहुत साधारण से कपड़े पहने स्टेशन के प्लेटफोर्म पर धूम रहे थे | एक स्त्री ने उन्हें कुली समझा और बुलाकर कहा,’’ये पत्र लेकर सामने के होटल में मेरे पति को दे आओ | मैं तुन्हें दो रूबल दूँगी !’’
टाल्स्टाय ने वह पत्र पहुँचा दिया और उन्होंने दो रूबल लिये थे कि उनका एक मित्र वहाँ आ पहुँचा और उसने ‘काउंट’ कहकर उनका अभिवादन किया | यह सुन उस स्त्री को बड़ा ही आश्चर्य हुआ और उसने उस नवागंतुक से पूछा, ‘’यह कौन हैं ?’’
टाल्स्टाय का परिचय प्राप्तकर वह महिला बेहद लज्जित हुई और उसने क्षमा माँगते हुए अपने रूबल वापस माँगे |
इस पर टाल्स्टाय हँसते हुए बोले, ‘’देवीजी, क्षमा करना तो परमात्मा का काम है | मैंने काम करके पैसे लिए हैं | अपनी मेहनत की कमाई क्यों लौटाऊँ ?’’

