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Bombay High Court: ‘असहमति की स्थिति में अप्राकृतिक यौन संबंध अपराध’, बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत खारिज कर कही बड़ी बात

मुंबईः बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपनी तरह के एक अनोखे मामले में महिला और पुरुष के बीच शारीरिक संबंध बनाने के तरीके में ‘नापसंदगी’ के महत्व को रेखांकित किया है। कोर्ट ने कहा कि रिश्ता बनाने के ढंग से जुड़ी अरुचि दोनों पार्टनर को कानून का सहारा लेने का अधिकार देती है। अदालत ने यह बात एक पायलट की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करने से जुड़े आदेश में कही। यह कहा गया है कि पायलट ने अपनी प्रेमिका के अप्राकृतिक संबंधों में अरुचि के कारण शादी तोड़ दी थी। इसके बाद प्रेमिका ने ठाणे के कापुरवाड़ी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई। मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी पायलट ने हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति एस.एम मोडक ने मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि रिश्ता बनाने का तरीका तय करना पार्टनर की पसंद पर निर्भर हो सकता है, लेकिन रिश्ते बनाने के कुछ तरीकों को प्रकृति व कानून के खिलाफ माना गया है। जैसे असहमति की स्थिति में अप्राकृतिक संबंध को धारा 377 के तहत अपराध माना गया है।

आरोपी को गिरफ्तारी से राहत नहीं
न्यायमूर्ति ने कहा कि इस मामले में आरोपी पायलट और उसकी प्रेमिका के बीच वॉट्सऐप पर संदेशों व तस्वीरों का जो आदान-प्रदान हुआ है, उससे इस मामले में धारा 377 जरूरी नजर आ रहा है, क्योंकि वॉट्सऐप की बातचीत में न सिर्फ प्राइवेट पार्ट की तस्वीरों को साझा किया गया है, बल्कि सेक्सुअल रिलेशन को लेकर अपने इंटरेस्ट को भी जाहिर किया गया है। लिहाजा पुलिस को अप्राकृतिक यौन संबंध के हर पहलू की जांच करने का अधिकार है। मामले के आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी है, इसलिए आरोपी को गिरफ्तारी से राहत नहीं दी जा सकती है।