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दिल्ली समेत कई शहरों में वायु प्रदूषण बना चिंता का विषय, पर्यावरणविद ने सुझाए ये उपाय

राष्ट्रीय राजधानी समेत अन्य दूसरे शहरों में वायु प्रदूषण चिंता का विषय बना. कई जगहों पर एयर क्वालिटी खराब से बहुत खराब दर्ज की गई. समीर ऐप के डेटा के मुताबिक, दिल्ली का ओवरऑल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 228 रहा. वहीं उत्तरी और मध्य भारत के कई दूसरे शहरों में भी पॉल्यूशन का लेवल बढ़ा हुआ देखा गया.

नोएडा में एक्यूआई 227, ग्रेटर नोएडा में 207, गुरुग्राम में 231 और बहादुरगढ़ में 225 दर्ज किया गया. बल्लभगढ़ में 266 जबकि गाजियाबाद में 163 दर्ज किया गया, जो इसे ‘मध्यम’ श्रेणी में रखता है. अन्य स्थानों में, भिवाड़ी में 295, पंचगांव में 274, कैथल में 264, खैरथल में 243, फतेहपुर सीकरी में 244, बड़ौत में 215, गजरौला में 219, हनुमानगढ़ में 210 और धारूहेड़ा में 201 एक्यूआई दर्ज किया गया.

दिल्ली के भीतर, मुंडका और उत्तम नगर में एक्यूआई रीडिंग 341 दर्ज की गई, जो उन्हें ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखती है. द्वारका सेक्टर 8 में 311, जहांगीरपुरी में 299, पंजाबी बाग में 283 और आरके पुरम में 277 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया. इसके उलट, घोगा में 129, लोधी रोड में 130, श्री अरबिंदो मार्ग में 149 और बदरपुर में 157 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया. आया नगर में 193 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया. ये सभी जगहें ‘मॉडरेट’ कैटेगरी में रही.

दूसरे राज्यों में भी हवा की क्वालिटी मिली-जुली दर्ज की गई

दूसरे राज्यों में मिली-जुली एयर क्वालिटी दर्ज की गई. कई शहरों में एयर क्वालिटी अलग-अलग रही, कुछ में हालत ठीक-ठाक रही जबकि कुछ ‘खराब’ कैटेगरी में रहे. राजस्थान में बीकानेर में एक्यूआई 253 रिकॉर्ड किया गया, जबकि हनुमानगढ़ में 210 रहा. भिवाड़ी में 295 और खैरथल में 243 रिकॉर्ड किया गया. उत्तर प्रदेश में वृंदावन में एक्यूआई 223 और गोरखपुर में 214 रिकॉर्ड किया गया. फतेहपुर सीकरी में 244 और बड़ौत में 215 रिकॉर्ड किया गया. मध्य प्रदेश में पीथमपुर में एक्यूआई 291 रिकॉर्ड किया गया, जबकि भोपाल में 100 रहा.

महाराष्ट्र के मुंबई में एक्यूआई 89, बोइसर में 88, डोंबिवली में 95 और पुणे में 93 दर्ज किया गया. भिवंडी में 119, जबकि धुले में 123 दर्ज किया गया. गुजरात में गांधीनगर में 111 और अहमदाबाद में 142 एक्यआई दर्ज किया गया. पंजाब के लुधियाना में 124 दर्ज किया गया.

उच्चतम और निम्नतम AQI रीडिंग

उच्चतम और निम्नतम एक्यूआई रीडिंग सूचीबद्ध स्थानों में मुंडका और उत्तम नगर में सबसे अधिक AQI रीडिंग 341 दर्ज की गई, इसके बाद द्वारका सेक्टर 8 में 311 दर्ज की गई. दिल्ली के बाहर, भिवाड़ी में एक्यूआई 295 दर्ज की गई, इसके बाद पीथमपुर में 291 और पंचगांव में 274 दर्ज की गई.

दूसरी ओर बोइसर में एक्यूआई 88, मुंबई में 89, पुणे में 93 दर्ज की गई. डोंबिवली 95.201-300 की एक्यूआई रीडिंग ‘खराब’ श्रेणी में आती है, जबकि 301-400 की रीडिंग ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आती है. ‘मध्यम’ श्रेणी में 101-200 की रीडिंग शामिल है, और 51-100 ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आती है.

एक्सपर्ट ने पूरे साल पॉल्यूशन कंट्रोल की अपील की

एनवायरनमेंट एक्सपर्ट और दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जितेंद्र नागर ने कहा कि दिल्ली की पॉल्यूशन प्रॉब्लम को सिर्फ सर्दियों में ध्यान देने वाली मौसमी परेशानी नहीं समझना चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पॉल्यूशन के सोर्स पूरे साल एक्टिव रहते हैं, जबकि सर्दियों के मौसम की वजह से अक्सर हालात और खराब हो जाते हैं.

नागर ने कहा कि बारिश धूल को जमाकर और हवा में मौजूद कुछ पॉल्यूटेंट को हटाकर कुछ समय के लिए राहत दे सकती है. हालांकि, सुधार बारिश की तेजी और समय, हवा की कंडीशन और एटमॉस्फियर में पॉल्यूटेंट के कंसंट्रेशन पर निर्भर करता है.

उन्होंने बताया कि बारिश रुकने के बाद भी पॉल्यूशन का लेवल फिर से बढ़ सकता है क्योंकि गाड़ियों, कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी और दूसरे स्रोतों से उत्सर्जन जारी रहता है. प्रोफेसर ने सर्दियों के उपायों पर खास तौर पर ध्यान देने के बजाय पूरे साल पॉल्यूशन कंट्रोल के लिए एक पूरी स्ट्रैटेजी अपनाने की अपील की.

पब्लिक ट्रांसपोर्ट और वेस्ट मैनेजमेंट पर ध्यान देने की जरूरत

नागर ने कहा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाना और प्राइवेट गाड़ियों पर निर्भरता कम करना जरूरी है. बसों और दूसरी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस को ज़्यादा आसान और बेहतर बनाने से लोग अपनी पर्सनल गाड़ियां घर पर छोड़ने के लिए बढ़ावा पा सकते हैं. उन्होंने रेगुलर सड़क की सफ़ाई, अच्छे वेस्ट मैनेजमेंट और पूरे साल धूल और प्रदूषण के दूसरे सोर्स से निपटने के लिए लैंडफिल साइट्स की कड़ी मॉनिटरिंग की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि सिर्फ सरकारी दखल ही पब्लिक की भागीदारी के बिना काफ़ी नहीं होगा. उन्होंने लोगों से कहा कि जहां तक हो सके पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें, प्राइवेट गाड़ियों का गैर-ज़रूरी इस्तेमाल कम करें और खुले में कचरा न जलाएं.

प्रदूषण सेहत और जिंदगी की क्वालिटी पर असर डालता है

नागर ने लोगों की सेहत और रोजमर्रा की ज़िंदगी पर प्रदूषण के बड़े असर के बारे में बताया, जिसमें सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, नींद और मूड शामिल हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि साफ हवा को मौसम की चिंता के बजाय एक बुनियादी जरूरत माना जाना चाहिए. उन्होंने पक्के सुधार के लिए सरकारी एजेंसियों, लोकल बॉडी, इंडस्ट्री और लोगों से मिलकर काम करने की भी अपील की.

गाजियाबाद ने एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क बढ़ाया

इस बीच, गाजियाबाद में रहने वाले उत्तर प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के रीजनल ऑफिसर अंकित सिंह ने कहा कि डिपार्टमेंट लोकल पॉल्यूशन लेवल का ज़्यादा सही अंदाजा लगाने के लिए अलग-अलग जोन में अपने मॉनिटरिंग नेटवर्क को बढ़ा रहा है.

सिंह ने कहा कि इंडस्ट्रियल, रेजिडेंशियल, कमर्शियल और ग्रीन-बेल्ट एरिया में कवरेज को बेहतर बनाने के लिए दो नए मॉनिटरिंग स्टेशन बनाए गए हैं. उन्होंने कहा कि नई तहसील में नया चालू स्टेशन एक्टिवली एयर क्वालिटी डेटा रिकॉर्ड कर रहा है.