Mumbai

नासिक में बारिश की कमी से खरीफ फसलें प्रभावित

नासिक, 02 अक्टूबर । बारिश में लंबे अंतराल के कारण जिले में खरीफ सीजन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस स्थिति के कारण किसानों को अपनी फसल से उत्पादन लागत निकलने की भी उम्मीद नहीं है। ऐसे में जिले के किसान अब सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता की आस लगाए बैठे हैं। दूसरी ओर, इस वर्ष नासिक जिले में औसत से कम बारिश होने के कारण जल संकट का खतरा भी मंडराने लगा है।

भूजल सर्वेक्षण एवं विकास एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जून से सितंबर 2025 के अंत तक नासिक जिले में औसत की तुलना में 23.96 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। जिले में वार्षिक औसत वर्षा 1,000.32 मिलीमीटर है, जबकि इस वर्ष सितंबर के अंत तक केवल 765.55 मिलीमीटर बारिश हुई। इस तरह बारिश में 234.67 मिलीमीटर की कमी दर्ज की गई है। बारिश की कमी का असर फसलों के साथ-साथ भूजल स्तर पर भी पड़ा है।

येवला में भूजल स्तर तीन मीटर से अधिक नीचे गिरा

भूजल स्तर की स्थिति का आकलन करने के लिए प्रत्येक जलग्रहण क्षेत्र में दो से तीन निगरानी कुओं का चयन किया गया था। सितंबर के अंत में इन कुंओं के जलस्तर की स्थिति दर्ज की गई और इसकी तुलना सितंबर महीने में पिछले पांच वर्षों के औसत स्थिर भूजल स्तर से की गई। रिपोर्ट के अनुसार, येवला तालुका में भूजल स्तर में तीन मीटर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं चांदवड़, देवला, मालेगांव, नांदगांव और सिन्नर में जलस्तर दो से तीन मीटर तक नीचे गया है। नासिक और त्र्यंबकेश्वर में एक मीटर तक की गिरावट दर्ज की गई है। केवल दिंडोरी और निफाड़ में भूजल स्तर में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है।

जलस्रोतों पर बढ़ा दबाव

बारिश में कमी और भूजल स्तर में गिरावट के कारण जिले में जलस्रोतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। बारिश की अनियमितता के चलते कुओं, बोरवेल और अन्य भूजल स्रोतों पर निर्भर किसानों के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

विशेष रूप से जिन तालुकों में बारिश की कमी 25 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है, वहां खरीफ फसलों के नुकसान के साथ आगामी रबी सीजन के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर भी गंभीर चुनौती सामने आ सकती है।

नासिक और बागलाण में भी बारिश की कमी

रिपोर्ट के अनुसार नासिक और बागलाण तालुका में 01 से 10 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज की गई है। बारिश कम होने और भूजल का दोहन बढ़ने के कारण कुओं तथा बोरवेल के जलस्तर में तेजी से गिरावट हो रही है। ऐसे में आने वाले समय में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता के साथ-साथ पेयजल संकट का सामना करने की आशंका भी बढ़ गई है। खरीफ फसलों के नुकसान के बाद अब किसानों की नजर सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता पर टिकी हुई हैं।