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ओमान के राजदूत ने ग्रीन हाइड्रोजन और भारत के साथ एनर्जी सहयोग पर दिया जोर

भारत में ओमान के राजदूत ईसा सालेह अब्दुल्ला अलशिबानी ने सोमवार को कहा कि ओमान ने ग्रीन हाइड्रोजन के लिए नीति तैयार कर ली है और 2030 तक इसे निर्यात करने की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन पर देश के फोकस को रेखांकित किया। दिल्ली में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) कॉन्क्लेव के दौरान अलशिबानी ने कहा, “जैसा कि मैंने अपनी स्पीच में कहा था, ओमान ने भी रिन्यूएबल एनर्जी के लिए एक मिशन का लक्ष्य रखा है और उनमें से एक ग्रीन हाइड्रोजन है। हमने ग्रीन हाइड्रोजन के लिए अपनी पॉलिसी तैयार की है। ओमान 2030 तक एक्सपोर्ट करने की क्षमता हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है।”

भारत-ओमान एनर्जी सहयोग को मिली नई दिशा

भारत भी क्लीन-एनर्जी ट्रांजिशन के तहत ग्रीन हाइड्रोजन पर तेजी से काम कर रहा है। नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ का मकसद भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और उससे बनने वाले उत्पादों के उत्पादन, इस्तेमाल और निर्यात के लिए एक वैश्विक हब बनाना है। दोनों देशों ने एनर्जी ट्रांजिशन को आपसी सहयोग के बड़े क्षेत्र के रूप में पहचाना है। दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओमान यात्रा के दौरान जारी भारत-ओमान संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने ‘ओमान विजन 2040’ और भारत के ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य के बीच तालमेल को नोट किया। नई और रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन तथा ग्रीन अमोनिया जैसे क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर भी सहमति बनी।

ओमान का विजन 2040 और SAF पर फोकस

ओमान के एविएशन सेक्टर में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल लाने की योजनाओं पर अलशिबानी ने कहा कि देश के ‘विजन 2040’ और ‘एयर विजन 2040’ के तहत नीतियां बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, “विजन 2040 और एयर विजन 2040 के तहत, आसमान को साफ रखने और एविएशन को ज्यादा कुशल बनाने के लिए नीतियां बनाई जा रही हैं। नेट-जीरो लक्ष्य तक पहुंचने के लिए दूसरे देशों के साथ मिलकर भी नीतियों पर चर्चा और सहयोग किया जा रहा है।”

भारत का SAF लक्ष्य: 2030 तक 5 प्रतिशत ब्लेंडिंग

भारत भी अपने SAF इकोसिस्टम को आगे बढ़ा रहा है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जुलाई में SAF के उत्पादन, सर्टिफिकेशन और सप्लाई-चेन डेवलपमेंट में हुई प्रगति की समीक्षा की थी। सभी पक्ष 2027 से SAF की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं। SAF पॉलिसी का ड्राफ्ट अपने अंतिम चरण में है। सरकारी प्रेस रिलीज के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए SAF ब्लेंडिंग के शुरुआती लक्ष्य तय किए गए हैं—2027 से 1 प्रतिशत, 2028 से 2 प्रतिशत और 2030 से 5 प्रतिशत।

समुद्री सुरक्षा पर भी समान दृष्टिकोण

समुद्री सुरक्षा और भारत के लिए ओमान के समुद्री इलाकों के महत्व पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की हालिया टिप्पणियों पर अलशिबानी ने कहा कि दोनों देश सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के सिद्धांत को मानते हैं। उन्होंने कहा, “सुरक्षित आवाजाही हमारी सरकार और भारत सरकार का मकसद है। हम एक ही सिद्धांत को मानते हैं कि सुरक्षा, शांति और बातचीत ही कई विवादों को सुलझाने का असली तरीका है।” इससे पहले शनिवार को डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में खाड़ी, लाल सागर और काला सागर सहित कई समुद्री इलाकों में कमर्शियल शिपिंग और नाविकों पर हमलों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने ऐसे हमलों को “पूरी तरह से अस्वीकार्य” बताया और कहा कि शिपिंग तथा समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा से कभी कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

SAF कॉन्क्लेव: नेट-जीरो एविएशन की दिशा में बड़ा मंच

‘इंडिया SAF कॉन्क्लेव एंड अवार्ड्स 2026’ का आयोजन 28-29 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है। दो दिन के इस कार्यक्रम का फोकस भारत में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल को अपनाने, उसके उत्पादन और नीतिगत विकास को गति देने पर है। यह सरकारी मंत्रालयों, एयरलाइंस, एयरपोर्ट्स, SAF उत्पादकों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, निवेशकों और वैश्विक उद्योग के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाता है।