पीएम मोदी ने विश्वकर्मा जयंती पर शिल्पकारों को दी शुभकामनाएं, साझा किया सुभाषित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भगवान विश्वकर्मा से जुड़ा सुभाषित साझा करते हुए निर्माण कार्यों में जुटे देशभर के शिल्पकारों और हुनरमंद लोगों का विशेष अभिनंदन किया। पीएम मोदी ने कहा कि उनका कौशल और परिश्रम विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शिल्पकारों के योगदान को बताया महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, “आप सभी को भगवान विश्वकर्मा जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। देवशिल्पी से जुड़े इस दिव्य अवसर पर निर्माण कार्यों में जुटे देशभर के शिल्पकारों एवं हुनरमंद साथियों को मेरा विशेष अभिनंदन।”
विकसित भारत के लिए कौशल और परिश्रम जरूरी
पीएम मोदी ने कहा कि शिल्पकारों का कौशल और परिश्रम विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के नवनिर्माण की दिशा में शिल्पकारों के प्रयासों को हरसंभव प्रोत्साहन मिलता रहे, इसके लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विश्वकर्मा अष्टकम का श्लोक किया साझा
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर विश्वकर्मा अष्टकम (या विश्वकर्मा स्तोत्रम्) का एक श्लोक भी साझा किया। उन्होंने लिखा, “अनादिरप्रमेयश्च अरूपश्च जयाजयः। लोकरूपो जगन्नाथः विश्वकर्मन्नमो नमः॥”
भगवान विश्वकर्मा को बताया अनादि और अप्रमेय
श्लोक के हिंदी भावार्थ में कहा गया है कि भगवान विश्वकर्मा अनादि और अप्रमेय हैं। उनका कोई एक निश्चित रूप नहीं है। वे जय-पराजय के निर्धारक हैं। संपूर्ण संसार भगवान विश्वकर्मा का ही स्वरूप है और वे इस जगत के पालनकर्ता हैं। ऐसे विश्व के निर्माता भगवान विश्वकर्मा को बार-बार प्रणाम किया जाता है।
श्लोक में भगवान विश्वकर्मा की महिमा
इस श्लोक के माध्यम से भगवान विश्वकर्मा की अनादि, अप्रमेय और अरूप सत्ता का वर्णन किया गया है। इसमें उन्हें जय और पराजय से परे तथा संपूर्ण लोकों के स्वरूप और जगत के स्वामी के रूप में नमन किया गया है।

