Wednesday, September 16, 2026
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काठमांडू, 16 सितंबर। नेपाल-चीन के प्रमुख व्यापारिक नाके रसुवागढी–केरुंग के बाढ़ के कारण बाधित होने के बीच एक अन्य महत्वपूर्ण सीमा नाका तातोपानी के संचालन को भी बंद कर दिया गया है। चीन की ओर से नाका कब खोला जाएगा, इसकी जानकारी नेपाल को नहीं दी गई है। रसुवागढी–केरुंग नाका बंद होने के तुरंत बाद चीन ने नेपाल को पत्र भेजकर तातोपानी नाका भी अस्थायी रूप से बंद करने की जानकारी दी थी। हालांकि, नाका बंद करने का कारण चीनी पक्ष ने स्पष्ट नहीं किया है। ल्हासा स्थित नेपाली महावाणिज्य दूत लक्ष्मीप्रसाद निरौला ने बताया कि उन्हें तातोपानी नाका बंद किए जाने का कारण और इसे दोबारा खोलने की तारीख की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि रसुवागढ़ी नाका बंद होने के बाद केरुंग में फंसे नेपाली पर्यटकों और मालवाहक कंटेनरों को तातोपानी तथा कोरला नाके के रास्ते नेपाल लाने के लिए चीन से अनुरोध किया गया था। पर्यटकों को तातोपानी नाके से लौटने की अनुमति दी गई, लेकिन मालवाहक कंटेनरों को अनुमति नहीं मिली। निरौला के अनुसार, रसुवागढी नाका बंद होने की स्थिति में यदि तातोपानी और कोरला दोनों नाकों का इस्तेमाल किया जा सके तो नेपाल-चीन व्यापार को काफी सुविधा होगी। इसके लिए चीन से औपचारिक अनुरोध किया गया है, लेकिन तातोपानी नाका खोलने के संबंध में अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। चीन ने 31 अगस्त को पत्र भेजकर तातोपानी नाका अस्थायी रूप से बंद करने की जानकारी दी थी। इस बीच, 4 सितंबर को चाइना डेली ने खबर दी थी कि चीन नेपाल के साथ प्रमुख स्थल व्यापारिक नाका झांगमु में सीमा जांच और सीमा शुल्क से संबंधित व्यवस्थाओं में बदलाव करने जा रहा है। स्थानीय सरकार के अनुसार, उच्च हिमाली क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और यात्रियों तथा उनके सामान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीमा जांच व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। झांगमु नाका शिगात्से के अंतर्गत सिजांग स्वायत्त क्षेत्र के न्यालाम में स्थित है। नई व्यवस्था के तहत नेपाल-चीन सीमा पार करने वाले यात्रियों को केवल निर्धारित मार्गों से ही आवागमन की अनुमति होगी। वे निर्धारित क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकेंगे और रास्ते में अपनी इच्छा से वाहन में चढ़ने-उतरने या निर्धारित स्थान के अलावा अन्य लोगों से संपर्क करने पर भी रोक होगी। बिना अनुमति नियंत्रित सड़क खंडों पर वाहन रोकने, यात्रियों को चढ़ाने-उतारने तथा माल लोड या अनलोड करने की भी अनुमति नहीं होगी। सीमा क्षेत्र से संबंधित नहीं होने वाले लोगों और वाहनों को भी उस क्षेत्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। तातोपानी सीमा शुल्क कार्यालय के प्रमुख दीपेन्द्र प्रकाश गिरी ने बताया कि 8 सितंबर से तातोपानी नाके से मालवाहक कंटेनरों की क्लीयरेंस नहीं हुई है। हालांकि, यात्री वाहनों को आने-जाने की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने भी नाका बंद किए जाने का कारण स्पष्ट जानकारी में नहीं होने की बात कही। रसुवागढी नाका बाधित होने और तातोपानी नाका बंद होने के बाद नेपाल-चीन के स्थल व्यापार के लिए फिलहाल मुस्तांग के कोरला नाके का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, कोरला नाका काठमांडू से रसुवागढी और तातोपानी की तुलना में काफी दूर है। कोरला से काठमांडू की दूरी करीब 481 किलोमीटर, काठमांडू-तातोपानी करीब 124 किलोमीटर और काठमांडू-रसुवागढी करीब 160 किलोमीटर है। इसके अलावा कोरला से केरुंग की दूरी करीब 600 किलोमीटर है। नेपाल हिमालय सीमापार वाणिज्य संघ के सचिव भक्त पराजुली के अनुसार, दूरी, लागत, समय और बुनियादी ढांचे समेत कई कारणों से चीन के साथ व्यापार के लिए तातोपानी नाका कोरला की तुलना में अधिक सुविधाजनक है। उन्होंने बताया कि केरुंग से कोरला पहुंचने में ही करीब एक दिन लगता है। पर्याप्त बुनियादी ढांचे और जनशक्ति की कमी के कारण सीमा शुल्क की प्रक्रिया भी एक दिन में पूरी नहीं हो पाती। इसके बाद सड़क की स्थिति और वाहनों के कारण काठमांडू तक सामान पहुंचने में करीब तीन दिन और लगते हैं। इससे परिवहन लागत बढ़ जाती है। कोरला नाके के रास्ते काठमांडू तक सामान पहुंचाने में करीब एक सप्ताह लग सकता है, जबकि तातोपानी नाका खुला होने पर चीन के खासा से काठमांडू तक सामान करीब एक दिन में पहुंचाया जा सकता है। कोरला नाके पर चीन की ओर अत्याधुनिक सीमा शुल्क कार्यालय का निर्माण किया गया है, लेकिन नेपाल की ओर आवश्यक बुनियादी ढांचा अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। कोरला नाके से करीब 10–12 किलोमीटर दूर नेचुड़ में सीमा शुल्क कार्यालय है। फिलहाल, कर्मचारी अस्थायी संरचना में दिनभर सीमा शुल्क की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शाम को नेचुड़ लौटते हैं।

बोगोटा, 16 सितंबर ।कोलंबिया के स्टार मिडफील्डर जेम्स रोड्रिगेज ने मंगलवार को 15 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर के बाद राष्ट्रीय टीम से संन्यास की घोषणा कर दी। 35 वर्षीय रोड्रिगेज ने उत्तरी अमेरिका में हुए हालिया फीफा विश्व कप के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कहने का फैसला किया।

रोड्रिगेज ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, “कई वर्षों, मैचों, खुशी के पलों और मुश्किल दौर से गुजरने के बाद मुझे लगता है कि अब अपनी जिंदगी के एक अध्याय को बंद करने का समय आ गया है—कोलंबिया की राष्ट्रीय टीम के साथ मेरा सफर। इस जर्सी को पहनना एक सपना था, लेकिन यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी थी।”

रोड्रिगेज ने 2011 में ला पाज में बोलीविया के खिलाफ जीत के दौरान कोलंबिया के लिए पदार्पण किया था। हालांकि 2014 फीफा विश्व कप में उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने टूर्नामेंट में गोल्डन बूट जीता और इसके बाद स्पेन के दिग्गज क्लब रियल मैड्रिड से जुड़ गए। रियल मैड्रिड के साथ उन्होंने दो ला लीगा खिताब जीते। इसके अलावा वह बायर्न म्यूनिख और एवर्टन के लिए भी खेल चुके हैं।

उन्होंने कहा, “मैं उन पलों को जीने के लिए भाग्यशाली रहा, जिनकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी—विश्व कप, गोल और अविस्मरणीय रातें; ऐसी जीत जिन्होंने हमें विश्वास करना सिखाया और ऐसी हार जिन्होंने हमें मजबूत बनाया।”

रोड्रिगेज ने कहा, “जब मैंने राष्ट्रीय टीम के साथ सफर शुरू किया था, तब मेरी इच्छा थी कि जब मैं आगे बढ़ूं तो टीम की जर्सी को पहले से अधिक मजबूत स्थिति में छोड़कर जाऊं। पीछे मुड़कर देखता हूं तो मुझे लगता है कि मैंने यह हासिल किया।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे नंबर 10 की जर्सी और कप्तान का आर्मबैंड पहनने का सम्मान मिला। मैंने इसे सम्मान, जिम्मेदारी और इस बात की समझ के साथ निभाने की कोशिश की कि कोलंबिया का प्रतिनिधित्व करने का क्या मतलब है। मेरे अच्छे दिन भी रहे और मुश्किल दिन भी, लेकिन मुझे इन रंगों पर गर्व महसूस होना कभी बंद नहीं हुआ।”

पिछले कुछ वर्षों में रोड्रिगेज ने कई क्लबों का रुख किया। उन्होंने ओलंपियाकोस, साओ पाउलो, रायो वालेकानो, क्लब लियोन और मिनेसोटा यूनाइटेड के लिए भी खेला। मौजूदा सत्र से पहले वह कोलंबिया के क्लब एटलेटिको नैशनल से जुड़े थे।

अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कहते हुए रोड्रिगेज ने कहा, “मैं पूरी शांति के साथ जा रहा हूं, क्योंकि मुझे पता है कि मैंने अपना सब कुछ दिया। हर याद, हर गले मिलने और हर पल के लिए धन्यवाद।”