आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने आयुर्वेद दिवस को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया है।
आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज कहा कि आयुर्वेद दिवस को एक जन आंदोलन बनना चाहिए, जिसके तहत आयुर्वेद से संबंधित साक्ष्य-आधारित जानकारी देश भर के हर घर, स्कूल, कॉलेज और कार्यस्थल तक पहुंचनी चाहिए।
नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए श्री जाधव ने घोषणा की कि 11वां आयुर्वेद दिवस इस महीने की 23 तारीख को नागपुर में मनाया जाएगा। इस वर्ष के आयोजन का विषय है “स्वास्थ्यवर्धक भविष्य के लिए आयुर्वेद”। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद दिवस केवल भारत की समृद्ध विरासत का जश्न मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं और संभावनाओं से इसे जोड़ने का भी एक अवसर है।
श्री जाधव ने इस बात पर जोर दिया कि आयुर्वेद दिवस भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणाली को आगे बढ़ाने और इसे वैश्विक स्वास्थ्य सेवा के भविष्य के अनुरूप ढालने का एक मंच है। मंत्री ने बताया कि दुनिया तेजी से निवारक स्वास्थ्य देखभाल, स्वस्थ जीवनशैली, पोषण, तंदुरुस्ती और समग्र स्वास्थ्य देखभाल की ओर अग्रसर हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत के पास इन सभी क्षेत्रों में समृद्ध परंपरा और व्यापक अनुभव है, जो आयुर्वेद को समकालीन स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में अत्यंत प्रासंगिक बनाता है।
इस अवसर पर श्री जाधव ने इस वर्ष के अभियान के तीन प्रमुख फोकस क्षेत्रों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। ये क्षेत्र हैं: बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सेवा; आयुर्वेद में साक्ष्य, अनुसंधान और नवाचार; और सामुदायिक कल्याण और सतत जीवन के लिए आयुर्वेद।
मंत्री जी ने आगे कहा कि सरकार का उद्देश्य एक ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली को बढ़ावा देना है जो विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों की खूबियों का लाभ उठाए, साथ ही आयुर्वेद की वैश्विक स्वीकृति बढ़ाने के लिए अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाए। उन्होंने 11 नवंबर 2026 को शुरू होने वाले अभियान में देशव्यापी भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि आयुर्वेद को एक स्वस्थ भारत और एक स्वस्थ भविष्य के निर्माण में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनना चाहिए।

