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जेपीएससी नियुक्ति घोटाले में ईडी ने दर्ज की ईसीआईआर, टीडीपीएल के निदेशकों समेत आठ नामजद

रांची, 10 अगस्त । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) नियुक्ति घोटाले में ईफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है। इसमें डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के दोनों निदेशकों समेत आठ लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। टीडीपीएल को भी मामले में अभियुक्त बनाए जाने के बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से इस एजेंसी को दिए गए परीक्षा संबंधी कार्य भी जांच के दायरे में आ गए हैं।

ईडी की ओर से दर्ज ईसीआईआर में टीडीपीएल के निदेशक सत्यपाल सिंह और रामबीर सिंह, जेपीएससी की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, आयोग के कर्मचारी मनोज तिर्की और सोनू कुमार को नामजद किया गया है। इसके अलावा टीडीपीएल के कर्मचारियों मोहम्मद उसमान और अवध तथा टीडीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी को भी अभियुक्त बनाया गया है।

ईडी की ईसीआईआर के अनुसार, जेपीएससी ने कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन करते हुए नॉमिनेशन के आधार पर टीडीपीएल को परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य सौंपे। एजेंसी को काम देने से पहले उसके पूर्व रिकॉर्ड और गतिविधियों की पर्याप्त जांच नहीं किए जाने का भी आरोप है।

ईडी के मुताबिक, टीडीपीएल को इससे पहले जेएसएससी की ओर से परीक्षा से जुड़े कार्य दिए गए थे। हालांकि, कथित गड़बड़ियों और अन्य कारणों के चलते जेएसएससी ने कंपनी को दिया गया वर्क ऑर्डर रद्द कर दिया था और कंपनी को अगले तीन वर्षों के लिए प्रतिबंधित भी किया गया था।

ईसीआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि टीडीपीएल ने उत्तर प्रदेश में भी कई परीक्षाओं का संचालन किया था। वहां भी कंपनी के खिलाफ परीक्षा संचालन में कथित अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आने की बात ईडी ने दर्ज की है।

ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, जेपीएससी के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने टीडीपीएल की संदिग्ध गतिविधियों के संबंध में तत्कालीन आयोग अध्यक्ष एल. खियांग्ते को जानकारी दी थी। इसके बाद असीम किस्पोट्टा से परीक्षा नियंत्रक का काम लेकर श्वेता गुप्ता को सौंपे जाने का उल्लेख ईसीआईआर में किया गया है।

ईडी के अनुसार, श्वेता गुप्ता का तबादला होने के बावजूद उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया और आयोग में उनसे काम लिया जाता रहा। ईसीआईआर में आरोप लगाया गया है कि सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले श्वेता गुप्ता ने परीक्षा की उत्तर कुंजी (आंसर-की) टीडीपीएल के कर्मचारी मोहम्मद उसमान को व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजी थी।

टीडीपीएल को मामले में अभियुक्त बनाए जाने के बाद एजेंसी की ओर से इस कंपनी को जेएसएससी द्वारा सौंपे गए परीक्षा संबंधी कार्यों की भी जांच किए जाने की संभावना है। ईडी की ईसीआईआर में कंपनी के पूर्व रिकॉर्ड, उसे दिए गए कार्य और कथित अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं को जांच का हिस्सा बनाया गया है।