FEATUREDNational

डिजीलॉकर और AAERI की साझेदारी से ऑस्ट्रेलिया जाने वाले भारतीय छात्रों के दस्तावेज सत्यापन में आएगी तेजी

ऑस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों के लिए दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया अब अधिक तेज, सुरक्षित और पेपरलेस होने जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) ने एसोसिएशन ऑफ ऑस्ट्रेलियन एजुकेशन रिप्रेजेंटेटिव्स इन इंडिया (AAERI) के साथ मिलकर ‘AAERI Verify’ डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म डिजीलॉकर के साथ सीधे एकीकृत होकर छात्रों के शैक्षणिक, पहचान और वित्तीय दस्तावेजों का सहमति-आधारित और स्रोत-सत्यापित सत्यापन उपलब्ध कराएगा।

कागजी प्रक्रिया से मिलेगी राहत

AAERI Verify को छात्रों की प्रमाण-पत्र जांच प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसके जरिए छात्र अधिकृत संस्थानों द्वारा जारी डिजिटल दस्तावेज सीधे सुरक्षित तरीके से साझा कर सकेंगे। इससे भौतिक दस्तावेजों पर निर्भरता और मैनुअल सत्यापन की जरूरत कम होगी।

दो चरणों में होगा दस्तावेज सत्यापन

नई डिजिटल व्यवस्था को दो प्रमुख चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में ‘Student Check’ होगा, जो विश्वविद्यालय में आवेदन शुरू होने से पहले किया जाएगा। दूसरे चरण में ‘Sponsor Check’ होगा, जो छात्र को प्रवेश प्रस्ताव मिलने के बाद उसकी वित्तीय स्थिति और प्रायोजन संबंधी दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच के लिए शुरू किया जाएगा।

सहमति के बाद साझा होंगे सत्यापित दस्तावेज

छात्र की स्पष्ट सहमति के बाद डिजीलॉकर के माध्यम से ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों को मूल जारीकर्ता संस्थानों द्वारा डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जा सकेंगे। इससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने, धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने और आवेदन प्रक्रिया में लगने वाले समय को घटाने में मदद मिलेगी।

वैश्विक चुनौतियों के समाधान में मददगार डिजिटल ढांचा

NeGD के निदेशक जेएल गुप्ता ने कहा कि यह साझेदारी दर्शाती है कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) वास्तविक वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में किस तरह मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि डिजीलॉकर को AAERI Verify से जोड़कर छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रवेश प्रक्रिया को सुरक्षित, पेपरलेस और भरोसेमंद बनाने वाला ढांचा तैयार किया गया है।

NeGD की भूमिका पर दी गई प्रस्तुति

जेएल गुप्ता ने NeGD की भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भूमिका पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी। वर्ष 2009 में MeitY के तहत स्वतंत्र बिजनेस डिवीजन के रूप में स्थापित NeGD मैक्रो प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, नीतिगत ढांचे और तकनीकी मूल्यांकन समेत विभिन्न जिम्मेदारियां निभाता है। यह सरकारी तंत्र में अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म और संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सरकारी संस्थानों के डिजिटल वर्कफ्लो को समर्थन

NeGD के डिजिटल प्लेटफॉर्म विभिन्न वैधानिक और सरकारी संस्थानों के सार्वजनिक कार्यप्रवाहों को समर्थन देते हैं। इनमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), विदेश मंत्रालय (MEA) और नीति आयोग (NITI Aayog) समेत कई संस्थान शामिल हैं।

डिजीलॉकर के 72 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता

MeitY के तहत NeGD की प्रमुख डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहल डिजीलॉकर नागरिकों को अधिकृत संस्थानों द्वारा जारी प्रामाणिक डिजिटल दस्तावेज सुरक्षित रखने, साझा करने और सत्यापित करने की सुविधा देता है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत विकसित डिजीलॉकर के वर्तमान में 72 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। यह अधिकृत संस्थानों द्वारा जारी डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेजों को सुरक्षित तरीके से जारी करने, संग्रहित करने, साझा करने और रियल-टाइम सत्यापन की सुविधा देता है।

वैश्विक शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल क्षमता का विस्तार

AAERI Verify की शुरुआत भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की घरेलू सफलता को वैश्विक शिक्षा व्यवस्था तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह पहल ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले भारतीय छात्रों के लिए दस्तावेज सत्यापन को अधिक पारदर्शी, तेज और सुरक्षित बनाने में मदद कर सकती है।