उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए उच्च शिक्षा को सशक्त बना रही सरकार, एआई और रोबोटिक्स पर जोर
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा को उभरती प्रौद्योगिकियों की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने के लिए पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धतियों और डिजिटल बुनियादी ढांचे में व्यापक बदलाव किए हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में बहुविषयक ज्ञान, व्यावहारिक कौशल और रोजगार क्षमता विकसित करने के साथ भविष्य की तकनीकी जरूरतों के लिए तैयार प्रतिभाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांता मजूमदार ने सोमवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
एआई, डेटा साइंस और रोबोटिक्स को पाठ्यक्रम में जगह
उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने उद्योग विशेषज्ञों के सुझावों को शामिल करते हुए अपने मॉडल पाठ्यक्रम में संशोधन किया है। तकनीकी शिक्षा के विभिन्न विषयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों को शामिल किया गया है।
2,100 से अधिक संस्थानों में एआई आधारित पाठ्यक्रम
वर्ष 2025-26 के दौरान एआईसीटीई से अनुमोदित 2,100 से अधिक संस्थानों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उभरते क्षेत्रों में पाठ्यक्रम शुरू किए। इन पाठ्यक्रमों में 2.80 लाख से अधिक छात्रों के प्रवेश की अनुमोदित क्षमता थी। इससे तकनीकी शिक्षा में उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े अध्ययन के अवसरों का विस्तार हुआ है।
राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क से कौशल शिक्षा का एकीकरण
छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने और एनईपी 2020 के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) जारी किया गया है। इसके माध्यम से कौशल शिक्षा को अकादमिक क्षेत्र के साथ एकीकृत करने का प्रावधान किया गया है। एनसीआरएफ के तहत कुल आवश्यक क्रेडिट का अधिकतम 50% कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के माध्यम से अर्जित किया जा सकता है।
उद्योग से जुड़ाव पर यूजीसी का जोर
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने ‘भारतीय विश्वविद्यालयों के लिए सतत और सशक्त विश्वविद्यालय-उद्योग संबंध प्रणाली संबंधी दिशानिर्देश’ जारी किए हैं। इनका उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना, विद्यार्थियों में आवश्यक कौशल विकसित करना और उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। एआईसीटीई की अनुमोदन प्रक्रिया पुस्तिका 2024-25 से 2026-27 में तकनीकी संस्थानों के लिए आवश्यक और वांछनीय आवश्यकताओं के तहत संस्थान-उद्योग प्रकोष्ठ, संस्थान की नवाचार परिषद की स्थापना और अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए अनिवार्य इंटर्नशिप जैसी शर्तों को भी शामिल किया गया है।
इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप से व्यावहारिक अनुभव
स्नातक छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने, अनुसंधान में रुचि विकसित करने और उन्हें उभरती प्रौद्योगिकियों से परिचित कराने के लिए यूजीसी ने स्नातकोत्तर छात्रों के लिए इंटर्नशिप और अनुसंधान इंटर्नशिप संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा, उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए अप्रेंटिसशिप-आधारित डिग्री कार्यक्रम (एईडीपी) संबंधी दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं, ताकि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में उद्योग की जरूरत के अनुरूप दक्षताओं को शामिल किया जा सके।
एआई अप्रेंटिसशिप से 75,000 से अधिक प्रशिक्षु लाभान्वित
शिक्षा मंत्रालय उद्योग के सहयोग से राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस) लागू कर रहा है। इसके तहत युवाओं को कार्यस्थल पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। एआई क्षेत्र में बढ़ती प्रतिभा की मांग को पूरा करने के लिए एनएटीएस के तहत एआई अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसमें स्नातकों, डिप्लोमा धारकों और एआईडीपी छात्रों को डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, एप्लीकेशन डेवलपमेंट और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक 75,000 से अधिक प्रशिक्षु इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो चुके हैं।
स्वयं पर एआई के 140 से अधिक पाठ्यक्रम
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) की क्षमता का उपयोग करने के लिए शिक्षा मंत्रालय आईसीटी के माध्यम से शिक्षा पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमईआईसीटी) लागू कर रहा है। इसके तहत ‘स्टडी वेब्स ऑफ एक्टिव लर्निंग फॉर यंग एस्पायरिंग माइंड्स’ (स्वयं) प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रमुख संस्थानों के निशुल्क पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उभरती प्रौद्योगिकियों में दक्षता बढ़ाने के लिए स्वयं प्लेटफॉर्म पर 140 से अधिक एआई-संबंधित पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिनमें अब तक 5 लाख से अधिक नामांकन हो चुके हैं।
ई-यंत्र से 70,000 से अधिक शिक्षार्थियों को प्रशिक्षण
परियोजना आधारित और अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एनएमईआईसीटी के तहत ई-यंत्र परियोजना रोबोटिक्स आधारित उपकरण और प्रशिक्षण के जरिए इंजीनियरिंग शिक्षा में स्वचालन तथा रोबोटिक्स को एकीकृत कर रही है। अब तक ई-यंत्र के माध्यम से 70,000 से अधिक शिक्षार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
स्वयं प्लस पर 500 से अधिक रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम
उद्योग-अकादमिक संबंधों को मजबूत करने और शिक्षार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने प्रतिष्ठित उद्योग भागीदारों के सहयोग से स्वयं प्लस प्लेटफॉर्म शुरू किया है। इस प्लेटफॉर्म पर रोजगारोन्मुखी कौशल विकसित करने वाले 500 से अधिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। ये पाठ्यक्रम सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और उन्नत विनिर्माण सहित 15 क्षेत्रों के 80 से अधिक उद्योग भागीदारों के सहयोग से तैयार किए गए हैं। स्वयं प्लस पर 6 लाख से अधिक शिक्षार्थी कौशल संवर्धन के लिए पंजीकरण करा चुके हैं।
फ्यूचरस्किल्स प्राइम से उभरती तकनीकों में प्रशिक्षण
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उभरती प्रौद्योगिकियों में शिक्षार्थियों का कौशल विकास करने के लिए ‘फ्यूचरस्किल्स प्राइम’ कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बिग डेटा एनालिटिक्स (एआई/बीडीए) सहित विभिन्न उभरती प्रौद्योगिकियों के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इन्हें उद्योग जगत के परामर्श से तैयार किया गया है, ताकि प्रशिक्षण रोजगार की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो। अब तक पोर्टल पर 34 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया है, जबकि एआई/बीडीए प्रौद्योगिकी में 95 लाख से अधिक उम्मीदवारों के नामांकन का उल्लेख किया गया है।

